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इस मेयर ने राहुल गांधी के सामने थामा कांग्रेस का दामन, कहा- मोची ने 200 रुपए दिया था चंदा, लोग नाखुश

पत्रिका से चर्चा के दौरान निर्दलीय मेयर ने कहा- अब भाजपा को हराने झोंकी जाएगी पूरी ताकत, दिल्ली में पूरी हुई मेरी इच्छा

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Chirimiri Mayor

Mayor with Rahul Gandhi

चिरिमिरी. चिरमिरी के निर्दलीय महापौर के. डोमरु रेड्डी ने बुधवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में दिल्ली में कांग्रेस प्रवेश किया है। इस अवसर पर कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि वेल डन, वेलकम, जुटिए अब पार्टी के काम में... बढिय़ा करो, सब मिलकर कांग्रेस की सरकार बनाओ। पत्रिका से बातचीत में महापौर ने कहा कि उन्हें चुनाव जीतने के लिए मोची ने 200 रुपए चंदे का आशीर्वाद दिया था।


कोरिया जिले के चिरमिरी निगम के महापौर रेड्डी ने कहा कि राहुल गांधी से उनकी मुलाकात करने का समय 4.30 बजे निर्धारित था लेकिन करीब दो घंटे इंतजार करने के बाद करीब 6.30 बजे मुलाकात हो सकी। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल ने महापौर रेड्डी का गर्मजोशी से स्वागत किया और कांग्रेस में विधिवत प्रवेश कराया।

महापौर रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस से बाहर जाने के बाद कभी भी दूसरी पार्टी में जाने का मन नहीं किया था और मेरी इच्छा थी कि में राहुल गांधी के हाथ से ही वापस आऊंगा। मेरी इच्छा दिल्ली में पूरी हो गई है। आगामी विधानसभा की दावेदारी के सवाल पर कहा कि मैं पहले ही कांग्रेस की कई इकाइयों के बड़े पद पर रह चुका हूं।

अगर पार्टी मुझे इस लायक समझेगी तो विधानसभा का चुनाव लड़ूंगा। वरना अगली बार फिर देखेंगे और अब पूरी ताकत से भाजपा को हराने के लिए काम करेंगे। इस दौरान छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी पीएल पुनिया भी मौजूद थे।


मोची ने दिया था 200 रुपए चंदे का आशीर्वाद
महापौर रेड्डी ने पत्रिका से चर्चा कर कहा कि मैं अपने घर वापस आया हूं। राहुल गांधी के नेतृत्व में राष्ट्रहित में यज्ञ चल रहा है। इसमें अपनी शक्ति और क्षमता के हिसाब से आहुति और लकडिय़ां मैं भी डालूंगा। वहीं पीसीसी चीफ का जैसा निर्देश मिलेगा, उस हिसाब से काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मैंने कांग्रेस छोड़ी थी, लेकिन किसी दूसरी पार्टी में कभी शामिल नहीं हुआ।


मैं था प्रबल दावेदार
रेड्डी ने कहा कि जिस वक्त मैं अपने शहर और अपने विधानसभा का सबसे प्रबल उम्मीदवार था। उस समय दूसरे को टिकट दे दिया गया था। इस बात से शहर के लोगों में नाराजगी थी। लोगों ने मुझे निर्दलीय लडऩे पर मजबूर किया था। महापौर चुनाव के वक्त यह तय हो गया था कि यदि मैं चुनाव नहीं लड़ता तो वह सीट भाजपा के पास चली जाती। जो मैं और मेरे समर्थक नहीं चाहते थे।

उस वक्त कांग्रेस और बीजेपी दोनों को मिला कर जीतने वोट मिले थे, उससे कही अधिक वोट से मैंने जीत दर्ज की थी। चुनाव लडऩे के लिए मेरे पास पैसे नहीं थे तो जनता ने मुझे चंदा दिया था। लोगों से 500-500 रुपए लिए थे, एक जगह मुझे एक मोची ने भी 200 रुपए देकर अपना आशीर्वाद दिया था लेकिन उसे 100 रुपए वापस कर दिया था। यह बताने का अर्थ केवल इतना है कि लोग क्या चाहते थे।


जनता से पूछ कर राजनैतिक पार्टी में जाने का किया था वायदा
महापौर रेड्डी के कांग्रेस में शामिल होने की खबर मिलने के बार शहर में तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मेयर ने शहर को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि महापौर ने बिना जनता दरबार लगाए ही ऐसा कर दिया है। उन्होंने घोषणा पत्र में जनता से पूछ कर किसी राजनैतिक पार्टी में जाने का वायदा किया था। सभी नेता एक जैसे ही होते हैं।

आज पूरा शहर जर्जर मुख्य मार्गों से जूझ रहा है और महापौर दिल्ली में घूम रहे हैं। आज तक अपने एक भी वायदे को पूरा नहीं किया है। वर्तमान में पूरा शहर पेयजल की समस्या जूझ रही है, पीने के लिए एक-एक बूंद को तरस रही है। बावजूद महापौर वायदे को भूल अपनी आगे की सीट पक्की करने में लगे हैं।