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16 वर्षोंं से चल रहा है 16 दिन श्राद्ध श्रद्धांजलि महोत्सव

कोटा. श्री कर्मयोगी सेवा संस्थान पिछले 16 वर्षों से हर वर्ष अलग - अलग वर्ग व तबके के दिवंगतों की आत्मशांति के लिए तर्पण करता है।

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कोटा

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abhishek jain

Sep 19, 2017

16 days of Pitru Paksha Shraddh Festival

कोटा. श्री कर्मयोगी सेवा संस्थान पिछले 16 वर्षों से हर वर्ष अलग - अलग वर्ग व तबके के दिवंगतों की आत्मशांति के लिए तर्पण करता है।

कोटा .श्राद्ध पक्ष यानी अपने दिवंगतों को याद करना, उनके लिए तर्पण करना। इस भागदौड़ की जिंदगी में जहां लोगों के पास अपनों के लिए ही समय नहीं है। वहीं एक सामाजिक संस्था है जो देश विदेश में अकाल मौत के शिकार हुए लोगों के लिए श्राद्ध और तर्पण करती है।

श्री कर्मयोगी सेवा संस्थान की ओर से पिछले 16 वर्षों से हर वर्ष श्राद्ध श्रद्धांजलि महोत्सव मनाता है और 16 दिनों में अलग अलग वर्ग व तबके के दिवंगतों की आत्मशांति के लिए तर्पण करता है। संस्थान के पदाधिकारियों का मानना है, जिनका कोई ध्यान नहीं रखता, उनकी आत्मशांति के लिए भी श्राद्ध तो होना ही चाहिए। संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष राजाराम जैन कर्मयोगी मानते हैं कि श्राद्ध का अर्थ श्रद्धा है। यह भाव सभी के प्रति हो।

इन सबके लिए करते हैं श्राद्ध

-शहर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले व समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य करते दिवंगत लोग
-कानून व न्याय रक्षा के क्षेत्र में सेवा करने वाले दिवंगत न्यायिक कर्मचारी, पुलिस कर्मचारी अधिकारी

-दिवंगत साधु सन्यासियों को समर्पित
-प्राकृतिक आपदाओं, मानवीय भूलों एवं अकाल मृत्यु के दिवंगतों की आत्मशांति के लिए श्राद्ध

-अजन्मी कन्या, भ्रूण हत्या की शिकार दिवंगत
-स्वतंत्रता संग्राम, जलियावाला बाग व दिवंगत स्वतंत्रता सैनानियों

-आतंकी घटना, साम्प्रदायिक, राजनीतिक, व्यक्तिगत व साम्राज्यवादी षडय़ंत्रों के शिकार व दुर्घटनाओं में मारे गए दिवंंगत
-विश्व विख्यात व्यक्तित्व, आत्महत्या तथा दुर्घटनाओं में मारे गए।

-दिवंगत खिलाड़ी, कलाकार, चित्रकार, लेखक, साहित्यकार, गीत व संगीतकार, देश के पूर्व शासक, राजपरिवारों के दिवंगत शासक।
- विश्व विख्यात दिवंगत महिलाओंं, जोहर की ज्वाला में सतीत्व की रक्षा के लिए प्राण देने वाली महिलाएं

- अन्तरराष्ट्रीय मानव कल्याण के क्षेत्र में योगदान, देश के विकास में सहयोगी बने, जनहित के कार्य करने वाले दिवंगतों की आत्मशांति

-अज्ञात एवं भूख से जान गवाने वाले दिवंगत।


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मूक जीवों के प्रति भी चिंतित
संस्थान के पदाधिकारियोंं की सोच इतनी भर नहीं। संस्थान श्राद्ध पक्ष में से एक दिन का चयन कर मृत जलीय, थल व नभचर जीवों की आत्मशांति के लिए भी श्राद्ध करते हैं।


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अजन्मी बालिकाओं का भी ध्यान

कर्मयोगी बताते हैं कि दुनिया में कई दिवंगत ऐसे हैं जिनकी आत्मशांति के लिए कोई श्राद्ध नहीं करता। ऐसे लोगों की भी आत्मा को शांति मिले, वहीं कल्याणकारी कार्य करते हुए दिवंगतों के कार्यांें से वर्तमान पीढ़ी प्रेरित हो और वह राष्ट्र की मूल धारा से जुड़कर राष्ट्र के विकास में मददगार बने, दिवंगतों की विश्व पर कृपा बनी रहे व विश्व में सुख समृद्धि तथा शांति बनी रहे।

ऐसे ही दृष्टिकोण को लेकर श्राद्ध करते हैं। संस्था पदाधिकारी अल्का दुलारी बताती हैं कि अज्ञात, कन्या भू्रण हत्या की शिकार अजन्मी बालिकाओं के लिए शायद ही कोई श्राद्ध करता हो। इसी सोच के साथ गत वर्षों से अजन्मी बालिकाओं के लिए श्राद्ध शुरू किया।


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अज्ञात दिवंगतों की आत्मशांति के लिए किया श्राद्ध

कोटा. श्री कर्मयोगी सेवा संस्थान की ओर से मंगलवार को अज्ञात दिवंगतों की आत्मशांति के लिए श्राद्ध किया गया। इस मौके पर उपस्थित लोगों ने वटवृक्ष और पीपल को जल देकर आत्म शांति का पाठ किया गया। बाद में जरूरतमंदों को भोजन कराया। संस्थापक अध्यक्ष राजाराम जैन कर्मयोगी व अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। संस्थान संयोजक अलका दुलारी ने बताया कि बुधवार को भूली बिसरे दिवंगतों की आत्मशांति के लिए पाठ किया जाएगा। शाम को 6 बजे दीप महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा।