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video : वकीलों ने kota में प्रभारी मंत्री के सामने दी स्‍वायत्‍त शासन मंत्री को गालि‍यां

कोटा में हाईकोर्ट बैंच स्थापना की मांग कार्यवाहक अध्यक्ष ने उप पंजीयक कार्यालय में आग लगाने की दी धमकी
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नेताओं के आए बुरे दिन...हाईकोर्ट बैंच की मांग को लेकर अब प्रभारी मंत्री पर भड़के वकील

कोटा . कोटा में high court हाईकोर्ट बैंच की स्थापना की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे वकीलों ने सोमवार को सर्किट हाउस में प्रभारी मंत्री Prabhu lal saini प्रभुलाल सैनी को घेर लिया। उनके सामने उनके ही खिलाफ जमकर नारे लगाए। इस पर सैनी नाराज हो गए। इससे पहले वकीलों ने कलक्टर कार्यालय के नीचे धरना दिया। साथ ही, उप पंजीयक कार्यालय में घुसकर मेज पलट दी और हेलमेट फेंक कर विरोध जताया। कुछ देर काम भी बंद करा दिया।

पिछले दिनों UDH minister स्वायत्त शासन मंत्री श्रीचंद कृपलानी की ओर से उदयपुर के वकीलों को दिए आश्वासन व मुख्यमंत्री द्वारा उदयपुर में बैंच स्थापना के लिए गठित कमेटी के विरोध में वकीलों ने सोमवार को एक दिन की सांकेतिक हड़ताल रखी।

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इस दौरान न्यायिक कार्य स्थगित रखा गया। टाइपिंग, कैंटीन, फोटोकॉपी और नोटेरी समेत सभी कार्य बंद रहे।अभिभाषक परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष अतीश सक्सेना के नेतृत्व में वकील अदालत परिसर में एकत्र हुए। यहां से सभी मुख्यमंत्री व स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे।

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वकील कलक्ट्रेट में घुसे और कलक्टर कार्यालय के नीचे धरने पर बैठ गए। यहां उन्होंने कमेटी की रिपोर्ट की प्रतियां जलाई। इसके बाद उप पंजीजक कार्यालय में घुसकर गैलेरी में रखी एक मेज पलट दी। कर्मचारी के हेलमेट को फेंक दिया। इसी दौरान सक्सेना ने धमकी दी कि यदि काम बंद नहीं किया तो यहां तोडफ़ोड़ कर कार्यालय में आग लगा देंगे। इस दौरान पुलिस मूकदर्शक बनी रही।

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इसके बाद वकील प्रभारी मंत्री प्रभुलाल सैनी से मिलने सर्किट हाउस गए। पुलिस उप अधीक्षक शिवभगवान गोदारा भी सर्किट हाउस पहुंच गए। यहां सैनी वकीलों से मिलने बाहर आए तो वकीलों ने उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। एक वकील ने तो मंत्री सैनी के सामने ही मंत्री कृपलानी के खिलाफ अपशब्द तक कह डाले।

मेरे खिलाफ नारेबाजी क्यों?
खुद के खिलाफ नारेबाजी से नाराज मंत्री सैनी ने कहा कि मैंने भी वकालत की है। उनके खिलाफ नारेबाजी क्यों की जा रही है। सैनी ने वकीलों से कहा कि वे उनके ज्ञापन को सकारात्मक अनुशंसा के साथ मुख्यमंत्री तक पहुंचा देंगे। इसके बाद वकील शांत हुए और वापस अदालत परिसर में लौट गए।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों का भी करेंगे विरोध

इससे पहले अदालत परिसर में हुई सभा में परिषद के पूर्व अध्यक्ष कृपाशंकर शृंगी, दीनानाथ गालव, रमेशचंद कुशवाह, जमील अहमद, दिनेशसिंह चौहान व शैलेश शर्मा समेत कई वकीलों ने विचार रखे। उन्होंने कोटा के स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा उनकी मांग में सहयोग नहीं करने पर नाराजगी जताई। सभी ने कहा कि यदि नेताओं का यही रवैया रहा तो कांग्रेस शासन काल में किए विरोध की तरह ही इस बार भी मंत्रियों को कोटा में नहीं घुसने देंगे, स्थानीय नेताओं का भी विरोध करेंगे।

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मंगलवार को दो घंटे का धरना
परिषद महासचिव जितेन्द्र पाठक ने बताया कि मंगलवार सुबह 10 से 12 बजे तक अदालत परिसर के बाहर धरना दिया जाएगा। साथ ही, 29 मई को सुबह 11 बजे हाड़ौती के वकील प्रतिनिधियों और विभिन्न संगठनों के साथ बैठक कर आगामी रणनीति तय की जाएगी।

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45 करोड़ की सड़क एक साल में दूसरी बार टूटी, गुणवत्ता पर सवाल यपाटन मार्ग पर करीब 45 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 22.50 किलोमीटर लंबी सड़क एक वर्ष के भीतर दूसरी बरसात भी नहीं झेल पाई। सड़क एक साल में दूसरी बार क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार सुवासा, बाजड और जमीतपुरा गांव के बीच करीब 15 स्थानों पर डामर जगह-जगह से उखड़ गया है और गिट्टी बाहर निकलने लगी है। क्षतिग्रस्त सड़क पर पैचवर्क की मांग को लेकर ग्रामीणों ने शनिवार को सुवासा कस्बे में विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर बने गहरे गड्ढों के कारण विशेष रूप से रात्रि के समय वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अंधेरे में गड्ढे दिखाई नहीं देने से आए दिन दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग से तत्काल पैचवर्क और सड़क की स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है। जानकारी के अनुसार, तालेड़ा से केशोरायपाटन तक सड़क निर्माण के लिए 45 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। निर्माण कार्य 15 अगस्त 2022 से शुरू हुआ था और इसे सितंबर 2023 तक पूरा किया जाना था, लेकिन सड़क के दोनों ओर लगभग डेढ़ मीटर पटरी निर्माण का कार्य अभी भी कई स्थानों पर अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क पर लगभग एक वर्ष पूर्व डामरीकरण किया गया था, लेकिन दिसंबर 2025 में सुवासा, बाजड और जमीतपुरा के बीच करीब 20 स्थानों पर सड़क उखड़ गई थी। उस समय संवेदक द्वारा पैचवर्क कर सड़क की मरम्मत की गई थी, लेकिन मरम्मत कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं रही। परिणामस्वरूप जुलाई 2026 में दूसरी बरसात शुरू होते ही सड़क फिर से उखड़ गई और कई स्थानों पर गिट्टी निकलने लगी है। लगातार टूट-फूट के कारण सड़क धीरे-धीरे बड़े गड्ढों में तब्दील होती जा रही है। इस मार्ग से प्रतिदिन करीब तीन हजार से अधिक छोटे-बड़े व भारी वाहन गुजरते हैं। यह सड़क नेशनल हाईवे 52 व मेगा हाईवे को जोड़ती है। सड़क की बदहाल स्थिति के कारण वाहन चालकों, किसानों, मजदूरों और आसपास के गांवह/वें के लोगों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। अभिषेक गुर्जर, सहायक अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, तालेड़ा ने बताया कि तालेड़ा से सुवासा के बीच कुछ स्थानों पर सड़क क्षतिग्रस्त हुई है और सड़क निर्माण का कुछ कार्य अभी शेष है। संवेदक का पूरा भुगतान अभी नहीं हुआ है। क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत करने के निर्देश संवेदक को दे दिए गए हैं। सड़क वर्तमान में गारंटी अवधि में है और इसकी मरम्मत संवेदक द्वारा ही कराई जाएगी।

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