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चम्बल नदी में जीवंत हो रही प्राचीन सभ्यता

चम्बल रिवरफ्रंट के निर्माण के दौरान नदी के किनारे कलात्मक बावड़ी का निर्माण भी किया जा रहा है। इस तरह से यहां प्राचीन सभ्यता को जीवंत करने का प्रयास किया जा रहा है।

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कोटा. मध्यप्रदेश से निकली चम्बल राजस्थान के कई जिलों से गुजरती है। इस पर पहली बार कोटा में रिवरफ्रंट बन रहा है। इसमें बावड़ी का निर्माण भी किया जा रहा है। यह बावड़ी रिवरफ्रंट को दुनिया के दूसरे रिवरफ्रंट से अलग करेगी। इसमें 350 से अधिक सीढि़यां होंगी। यह बावड़ी 40 मीटर लंबी और 30 मीटर चौड़ी है। बावड़ी के चारों तरफ 16 छतरियां होंगी। बावड़ी में फाउंटेन लगेंगे। भरतपुर के बंसी पहाड़पुर के पत्थरों से जलीय और वन्यजीवों के मॉडल्स लगाए जाएंगे। बावड़ी के चारों तरफ प्रवेश द्वार होंगे। चंबल नदी की ओर छह घोड़े होंगे। पुराने शहर की दीवार की तरफ ग्रीन बेल्ट बनेगी। न्यास के अधिकारियों के अनुसार बाढ़ नियंत्रण को ध्यान में रखकर इसका निर्माण कार्य किया जा रहा है। घाटों के निर्माण में तकनीकी दृष्टि से नदी के बहाव क्षेत्र को बढ़ाया जा रहा है। वहीं अनेक देशों की वास्तुकला को एक फसाड़ के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। घाट पर लोगों के बैठने व भ्रमण करने की सुविधा बनाई जा रही है। पूरे रिवरफ्रंट पर हर स्थान पर रैम्प से जाने की सुविधा दी जा रही है। बावड़ी में साफ पानी रहेगा। इसमें पानी को रिफ्रेश करने का स्वचलित सिस्टम रहेगा। बावड़ी में फाउंटेन के लिए लाइटिंग की व्यवस्था रहेगी। इसके अलावा बावड़ी के चारों तरफ बच्चों के लिए विशेष गार्डन होगा। नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने बताया कि चम्बल रिवरफ्रंट पूरी दुनिया के पर्यटकों का ध्यान खींचेगा। कोटा पर्यटक नगरी बनाने के लिए इसका निर्माण किया जा रहा है। न्यास के सचिव राजेश जोशी ने बताया कि इस साल इसका कार्य पूरा कर लिया जाएगा।