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पहले पिता के निधन के शोक में डूबे, फिर जैसलमेर की रेत में सूर्योदय से सूर्यास्त तक 80km दौडे और बन गए कोटा के पहले टफमेन

कोटा. कोटा के युवा पढ़ाई के साथ-साथ खेल स्पर्धाओं में भी श्रेष्ठता साबित कर रहे है। बीमारियों से जंग जीत प्रेरणा साबित हो रहे हैं|

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कोटा

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abhishek jain

Jan 02, 2018

Tuffman of Kota

कोटा .

कोटा के युवा पढ़ाई के साथ-साथ खेल स्पर्धाओं में भी श्रेष्ठता साबित कर स्वास्थ्य जागरूकता का अदभूत संदेश दे रहे है। बीमारियों से जंग जीत साथियों व शहरवासियों के लिए प्रेरणा साबित हो रहे हैं। ऐसे ही एक युवा हैं अविनाश बेदी जिन्होंने पिछले दिनों जैसलमेर में आयोजित स्पर्धा में 12.40 घंटे में 80 किलोमीटर दौड़कर फुल टफ मेन की दौड़ पूरी की। रेस पूरी करने के पांच दिन पहले पिता के निधन से शोक में आए एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट में कार्यरत अविनाश बेदी ने परिवार और दोस्तों के प्रोत्साहन से 80 किलोमीटर दौड़ पूरी कर कोटा के पहले टफ मेन चेलेंज पूरी करने वाले धावक बने।

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सूर्यादय से सूर्यास्त तक दौडे

रेस पूरी करने के बाद कोटा लौटे अविनाश ने बताया कि यह दौड़ सबसे मुश्किल दौड़ में से एक थी। क्योंकि रास्ते में रेत भी थी। सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक दौडऩा था। 16 किलोमीटर के 5 लूप में दौडऩा था। इसमें भी 4 किलोमीटर क्षेत्र में दौड़ के लिए अनुकूलित सड़क थी, इसके अलावा 12 किलोमीटर में हल्की रेत थी, जिस पर दौडऩा चुनौतीपूर्ण था। साढ़े 9 घंटे में 61 किलोमीटर की दौड़ पूरी कर लेने के बाद मेरी स्मार्ट वॉच बंद हो गई। कटऑफ टाइम 13 घंटे था। इसके बाद समय और दूरी का अंदाजा लगाकर दौडऩा पड़ा। एक बड़ी चुनौती तापमान भी रहा। जब सुबह 5.30 बजे दौड़ शुरू की तो तापमान करीब 4 डिग्री सेल्सियस था। इसके बाद दोपहर एक बजे बढ़ते-बढ़ते यह तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। तापमान में इतना बदलाव शरीर की क्षमता पर असर करता है।
80 किलोमीटर की स्पर्धा में मात्र 5 प्रतिभागी
बेदी ने बताया कि 80 किलोमीटर की स्पर्धा में मात्र 5 प्रतिभागी थे। इसमे उसने तीसरे स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा कोटा से सात प्रतिभागी ऐसे रहे जिन्होंने इस रेस में 50 किलोमीटर की दौड़ पूरी की। इनमें अंकुश वर्मा, अनुपम वर्मा, सुनील विजय, राजेश भाटिया, नरेन्द्र अवस्थी, पंकज जोशी, कुमार विकास जैन शामिल हैं।

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ये है टफ मेन इंडिया

टफ मेन इंडिया द्वारा गेट-सेट-रन (जीएसआर) के नाम से यह स्पर्धा आयोजित की गई। यह दौड़ हर वर्ष देश के अलग-अलग हिस्सों में होती है, जहां भौगोलिक रूप से अलग-अलग चुनौतियां होती हैं। इस बार जैसलमेर में हुई, जहां रैतीले क्षेत्रों में दौडऩा पड़ा। इसमें तीन तरह की स्पर्धाएं शामिल थीं। अल्ट्रा टफ मेन के लिए 220 किलोमीटर की दौड़ थी, फुल टफ मेन के लिए 80 किलोमीटर तथा हॉफ टफ मेन के लिए 50 किलोमीटर की दौड़ थी।
बीपी की टेबलेट शुरू हो गई थी
अविनाश ने बताया कि सोच लें तो कुछ भी कठिन नहीं है। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं कभी इतना दौड़ सकूंगा। 2001 में मेरा वनज 91 किग्रा था, अनफिट होने के कारण डॉक्टर ने ब्लड प्रेशर की टेबलेट शुरू कर दी थी। इसके बाद फिटनेस के लिए जिम ज्वाइन किया, एरोबिक्स की तो टेबलेट बंद हो गई। कुछ दोस्त मिले, जिन्होंने रेगुलर दौडऩे के लिए प्रेरित किया, बस यहीं से सबकुछ बदल गया। करीब सवा साल पहले ही मैंने रनिंग शुरू की। अभी वजन 74 किग्रा है। पहली बार दिसम्बर में ही 10 और 25 किलोमीटर की प्रेक्टिस रन पूरी की थी।

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100 किमी टारगेट

अब तक जयपुर व दिल्ली में दो हाफ मैराथन, हैदराबाद में एक फुल मैराथन दौड़ चुका हूं। 80 किमी की दौड़ अभी पूरी की है। अब 100 किमी की दौड़ पूरी करना चाहता हूं। अक्टूबर 2018 में यह दौड़ होगी, इसके अलावा लद्दाख में होने वाले खारदूंगला चैलेंज तथा साउथ अफ्रिका में होने वाली विश्व की प्रतिष्ठित दौड़ कोमोरेड्स भी पूरी करना चाहता हूं। यह 89 किलोमीटर का रन होता है। परिवार में पत्नी पुनीता हर कदम पर सपोर्ट करती है, छोटा भाई आनन्द व मां राशि ने भी मुझे हर पल आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया।