
Kota News : कोटा जिले के मोड़क स्थित मंगलम् सीमेंट फैक्ट्री से निकलने वाली धूल से प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है। फैक्ट्री के आस-पास रहने वाले ग्रामीण बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं साथ ही किसानों का भी बूरा हाल है। प्रदूषण की वजह से आस-पास के गांवों में मिर्ची की फसल भी तबाह हो गई। इससे फैक्ट्री के आस-पास रहने वाले ग्रामीण बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। कई ग्रामीण टीबी व दमा से पीड़ित हैं। फैक्ट्री प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी से दूर भाग रहा है। प्रशासन भी आंखें मूंद कर बैठा है। आस-पास के गांवों में मिर्ची की फसल भी तबाह हो गई है। पत्रिका टीम ने फैक्ट्री के समीप के गांवों के हाल जाने तो तस्वीर भयावह नजर आई। लोगों का कहना है कि कारखाने से दिन-रात धूल उड़ती रहती है। इससे कई लोगों के फेफड़े खराब हो गए हैं।
गांवों में दमा के मरीजों की संख्या अधिक है। दमा के मरीज अधिकांश वे सामने आए, जो पहले फैक्ट्री में काम करते थे। फैक्ट्री में कार्य करते समय उड़ने वाले सीमेंट और मिट्टी से दमा के मरीज हो गए हैं। इस फैक्ट्री की सीमेंट के कण और धूल की परत आस-पास के खेतों में जम जाती है। इससे फसलें बर्बाद हो रही हैं। किसानों की कई बार मिर्ची की फसल बर्बाद हो चुकी है। इस कारण ज्यादातर किसानों ने तो मिर्ची की खेती करना ही छोड़ दिया है। अब किसान ग्रीन हाउस व पॉली हाउस लगा मिर्ची व अन्य खेती करते हैं, लेकिन फैक्ट्री से उड़ रही धूल से परेशान हैं।
ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी डॉ. रईस खान का कहना है कि मोड़क क्षेत्र के सभी अस्पतालों में दमा, अस्थमा और टीबी के मरीजों की संख्या बहुत अधिक है। आउटडोर में प्रतिदिन ऐसे मरीजों की तादाद काफी रहती है। सीमेंट से डस्ट घातक होती है।
मंगलम् सीमेंट फैक्ट्री मोड़क के प्रबंधक आरपी सिंह बताते हैं कि आस-पास के गांवों में मेडिकल वैन का संचालन करना सरकारी नियमों में नहीं आता है। फिर भी हम लोगों को चिकित्सा उपलब्ध करवाते हैं। मेडिकल वैन कहां जाती है, कहां नहीं जाती है? इसकी जानकारी नहीं है।
कोटा के प्रदूषण नियंत्रण विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी अमित सोनी के मुताबिक फैक्ट्री के आस-पास प्रदूषण की विभाग की ओर से लगातार जांच करवाई जाती है। फसलों के नुकसान का कोई अध्ययन नहीं करवाया है।
Published on:
30 Mar 2024 04:58 pm
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