कहीं आप भी जाने - अनजाने में तो नहीं कर रहे अपनी जान के साथ खिलवाड़..

आप जिन बोट में बोटिंग कर रहे है उनके चालकों के पास ड्राइविंग लाइसेंस ही नहीं है |

By: shailendra tiwari

Published: 24 May 2018, 02:56 PM IST

कोटा . सड़क पर वाहन चलाने वाले चालक के पास लाइसेंस नहीं तो पकड़े जाने पर जुर्माना भुगतना पड़ता है, लेकिन चंबल में बोट चलाने वाले चालक का कोई लाइसेंस नहीं। विश्वास नहीं होता होगा, लेकिन यह हकीकत है। मामला पर्यटकों की सुरक्षा से सीधा जुड़ा हुआ है।

वन विभाग ने जिन boats को पंजीकृत किया, उन्हें चलाने वाले चालकों का लाइसेंस तक नहीं है। विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार बोटों को पंजीकृत करने के लिए नाव व नाव चालक के पास सक्षम अधिकारी द्वारा जारी लाइसेंस एवं फिटनेस प्रमाण-पत्र होना चाहिए। विभाग ने बोटों का पंजीकरण करते समय फिटनेस certifiate तो ले लिया लेकिन बोट चालक के लाइसेंस को देखना तक मुनासिब नहीं समझा।

 

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दिशा-निर्देशों में है जिक्र
कार्यालय उप वन संरक्षक वन्यजीव कोटा द्वारा बोट संचालन को लेकर कुछ 28 दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसमें पहले नियम में ही साफ लिखा है कि नाव एवं नाव चालक के पास सक्षम अधिकारी द्वारा जारी लाइसेंस व फिटनेस प्रमाण पत्र होना आवश्यक है, उसे पर्यटकों का बीमा भी करवाना होगा।


नहीं मिल सकता क्लेम
जानकारी के अनुसार यह मामला सिर्फ इस वर्ष का नहीं, फर्मों के संचालक चालक के लाइसेंस के बिना वर्षों से बोट दौड़ा रहे हैं, लेकिन कहीं कोई दुर्घटना घट जाए तो उनका बीमा क्लेम में भी मुश्किल हो सकती है।


नहीं दी संतुष्टिपूर्ण जानकारी
कुन्हाड़ी निवासी तपेश्वर सिंह भाटी ने सूचना के अधिकार के तहत मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व कार्यालय से बोट चालक के लाइसेंस सम्बन्धित जानकारी वन विभाग से मांगी थी, लेकिन विभाग ने संतुष्टिपूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई।

 

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जरूरी है लाइसेंस
वाटर बोट चालक का लाइसेंस होना जरूरी है। किसी को वाटर बोटमैन के लाइसेंस को लेकर कहीं कोई कनफ्यूजन है तो हमसे पूछा जा सकता है। बोट लाइसेंस निर्धारित प्रक्रिया के तहत दिया जाता है। सबसे पहले चालक को तैरना आना चाहिए, कोई घटना होने पर वह दूसरे को बचाने के साथ खुद को भी बचा सके, सीपीआर देना जानता हो, बोट की टेक्निकल जानकारी हो, अचानक खराब होने पर ठीक कर सके, इन सभी बातों में पास होने के बाद लाइसेंस दिया जाता है।

चालक व नाव चालक के लाइसेंस के मामले में पता किया जाएगा। पूरी जानकारी जुटाई जाएगी। किसी भी स्थिति में नियमों की अनदेखी नहीं होगी।
-टी मोहनराज, उप वन संरक्षक, मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व

 


जागा वन विभाग, अब करेगा बोट की जांच

चंबल में नियम तोड़ कर पुरानी बोटों से पर्यटकों को सफर कराने और उनके जीवन को खतरे में डालने का मामला उजागर होने के बाद अब वन विभाग के अफसर भी जागे हैं। वन विभाग ने कहा है कि वे चंबल में चल रही बोटों की जांच करेंगे और नियम विरूद्ध चल रही बोटों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। 'राजस्थान पत्रिकाÓ ने बुधवार को यह मामला उजागर किया था।


यह है मामला
चंबल में बोटिंग के लिए वन विभाग ने गत दिनों तीन फर्मों के पांच बोटों का पंजीकरण किया है, लेकिन इनमें आरजे -20-06, आरजे -20-032 व आरजे-20-046 तीन ऐसी बोटों का भी पंजीकरण कर लिया जो पांच वर्ष से अधिक पुरानी हैं। विभाग की ही शर्तों के अनुसार चंबल में पांच वर्ष से अधिक पुरानी बोट का संचालन नहीं किया जा सकता।

 

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मामले की जांच कराई जाएगी। चंबल में कोई बोट नियमों के विरुद्ध नहीं चलने दी जाएगी। सम्बन्धित अधिकारी से इस सम्बन्ध में जानकारी ली जाएगी। कमी पाई गई तो बोट संचालन बंद करवा दिया जाएगा।
-घनश्याम शर्मा, मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव विभाग

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