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बाउंसर को दादागिरी करनी पड़ी भारी, पुलिस ने शुरू की कार्रवाई

कोटा. हैरिटेज चंबल रिवर फ्रंट पर बाउंसर्स को बिना बुकिंग व पहचान पत्र की जांच किए बिना प्रवेश देने का वीडियाे इतना नागवार गुजरा कि उन्होंने दादाबाड़ी निवासी एक युवक से मारपीट कर दी।

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कोटा

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Mukesh Sharma

Sep 25, 2023

कोटा. हैरिटेज चंबल रिवर फ्रंट पर बाउंसर्स को बिना बुकिंग व पहचान पत्र की जांच किए बिना प्रवेश देने का वीडियाे इतना नागवार गुजरा कि उन्होंने दादाबाड़ी निवासी एक युवक से मारपीट कर दी। इस मामले में जब युवक मारपीट करने वाले बाउंसर का वीडियो बनाने लगा, तो उसने एक बार फिर उस पर हमला कर उसका मोबाइल नीचे फेंक दिया, लेकिन पूरा मामले का वीडियो मोबाइल में दर्ज हो गया। जो सोशल मीडिया पर जम कर वायरल हो रहा है।

दादाबाड़ी निवासी अर्पण चौरसिया ने बताया कि उन्होंने रविवार दोपहर स्लॉट खुलने पर परिवार के दस सदस्यों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाया था। इसके बाद वे शाम करीब 6 बजकर 10 मिनट पर रिवर फ्रंट के पश्चिमी किनारे पर शौर्य घाट पर कतार में खड़े थे। करीब 45 मिनट खड़े रहने के बाद उनके भाई आशीष चौरसिया ने देखा कि गेट से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और पहचान पत्र दिखाए बिना ही गार्ड प्रवेश दे रहे थे। इस का कारण पूछने पर वह अभद्रता करने लगे। इस पर अर्पण इसका वीडियो बनाने लगा। इसी दौरान एक बाउंसर आया और जोर से उसके चेहरे पर जोर से मुक्का मारा। इससे उसके मुंह से खून निकल आया। इस पर लाइन में लगे परिजन वहां पहुंचे तो उससे मारपीट बंद कर दी। अर्पण ने बाउंसर का नाम वर्दी पर नहीं होने से पहचान के लिए उसका वीडियो बनाया, तो वह दौड़ता हुआ वापस आया और उससे मारपीट करते हुए उसका मोबाइल छीन कर नीचे फेंक दिया, लेकिन मोबाइल टूटने से बच गया और पूरा मामले का वीडियो बन गया। इस आधार पर अर्पण ने कुन्हाड़ी थाने में मामला दर्ज करवाने के लिए परिवाद दिया है। पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि चंबल रिवर फ्रंट पर सुरक्षा के लिए होमगार्ड के स्थान पर बाउंसर्स तैनात कर दिए गए है। यहां 180 सिक्योरिटी गार्ड व 60 बाउंसर्स तैनात किए गए है।

बिना नेमप्लेट मास्क लगा करते है ड्यूटी

रिवर फ्रंट पर लगाए गए गार्ड्स और बाउंसर्स की ड्रेस पर कोई नेमप्लेट नहीं लगाई गई है। इसके अलावा वे अपनी पहचान छुपाने के लिए मुंह पर मास्क लगाकर ड्यूटी करते थे। ऐसे में अभद्रता करने पर लोगों को उनके नाम का पता नहीं लग पाता। कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों ने नंबर भी सार्वजनिक नहीं किए गए है। न ही यहां शिकायत पंजिका उपलब्ध करवाई गई है।