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अब सोशल मीडिया पर उठी चाइनीज फूड के बहिष्कार की मांग

ब्रिटिश राजधानी होने के नाते उस दौरान कई चीनी नागरिक आए और वहीं बस गए।    

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अब सोशल मीडिया पर उठी चाइनीज फूड के बहिष्कार की मांग

अब सोशल मीडिया पर उठी चाइनीज फूड के बहिष्कार की मांग

कोटा. गलवन घाटी पर हुई हिंसक झड़प के दौरान भारत के 20 जवान शहीद हुए हैं। चीन को लेकर पूरे देशभर में गुस्सा है। कोटा में भी चीन के खिलाफ हुए प्रदर्शन में लोगों ने चीनी सामानों के बहिष्कार (Boycott chinise product) की शपथ ली है। राजनीतिक, व्यापारिक और सामाजिक संगठन एक मंच पर आकर बॉयकट चाइनीज प्रॉडक्ट अभियान का समर्थन कर रहे हैं। इसी बीच सोशल मीडिया में अब चीनी फूड के बहिष्कार की मांग भी जोर पकड़ कही है। यूजर लगातार चीनी फूड की जगह भारतीय खान-पान को बढ़ावा देने की मांग कर रहे हैं।

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हालांकि कुछ लोगों का तर्क ये भी है कि भारत में चीनी स्ट्रीट फूड की वजह से कई लोगों को रोजगार मिल रहा है। इसका चीन की अर्थव्यवस्था से कोई लेना-देना नहीं है। आइए नजर डालते हैं कुछ ऐसे चाइनीज फूड के बारे में जो स्ट्रीट फूड के तौर पर भारत में काफी लोकप्रिय है।

चाऊमीन, मोमोस, फ्राइड राइस, स्प्रिंग रोल और मानचाऊ सूप, कुछ ऐसे चाइनीज फूड हैं जो आसानी से हर रेस्टोरेंट और चौपाटी में मिल जाते हैं। कोटा में खासतौर पर कोचिंग क्षेत्र में 1000 से वेंडर्स चाइनीज फूड बेचते हैं।

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कोलकाता में हुई थी शुरुआत
माना जाता है भारत में चाइनीज खाने की शुरुआत कोलकाता से हुई थी। चीनी नागरिक यांग ताई चॉ 1778 में कोलकाता आए थे। ब्रिटिश राजधानी होने के नाते उस दौरान कई चीनी नागरिक आए और वहीं बस गए। इन लोगों ने कोलकाता में एक चाइनाटाउन विकसित किया। यहीं से भारत में चीनी खाने के शुरुआत हुई थी। करीबन 90 साल पहले इंडो चीनी रेस्टोरेंट एओ चिउ की शुरुआत भी कोलकाता में हुई थी, ये भारत में पहला ऐसा रेस्टोरेंट था।