कोटा. कोटा की देवनारायण योजना में बनाए गए देश के सबसे बड़ा बायो गैस प्लांट ने सोमवार को जैविक खाद उगलना शुरू कर दिया। यह खाद डीएपी का जैविक विकल्प बनेगी। प्लांट की उत्पादन क्षमता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस एक प्लांट से पूरे हाड़ौती क्षेत्र की डीएपी की जरूरत को जैविक खाद से पूरा किया जा सकता है। इसके अलावा जैविक तरल खाद से सरकारी उद्यान, डिवाइडर व सार्वजनिक हरियाली वाले क्षेत्रों को पोषण मिल सकेगा।
यह प्लांट जैविक खाद फॉस्फेट रिच आर्गेनिक फर्टिलाइजर बनाएगा। इसके अलावा 17 आवश्यक तत्वों वाला जैविक तरल खाद भी बनाएगा। यहीं नहीं प्लांट से प्रतिदिन 3 हजार लीटर कम्प्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) उपलब्ध करवाएगा, जो वाहनों के लिए कंपनियों को बेची जाएगी। इसके लिए कंपनियों से करार भी हो चुका है।
ऐसे काम करता है प्लांट
प्लांट में 40-40 लाख टन क्षमता के दो अनलोडिंग टैंक है। इनमें सबसे पहले गोबर पहुंचता है। इसके बाद यह गोबर सेडिमेंटेंशन टैंक में पहुंचता है, जहां गोबर से मिट्टी अलग होती है। इसके बाद फीडिंग टैंक में पहुंचे गोबर से अन्य गंदगियां दूर हो जाती है, यहां से गोबर 50-50 लाख लीटर के दो डाइजेस्टर में पहुंचता है, जहां 30 दिनों की प्रकिया के बाद इसमें से गोबर गैस निकलती है। इसमें मीथेन गैस से कम्प्रेस्ड बायो गैस बनाई जाती है। यह बिल्कुल सीएनजी जैसी है। शेष पदार्थ से तरल व ठोस दो तरह का खाद बनता है।
कोटा यूआईटी के बायो गैस सलाहकार पूर्व कृषि प्रोफेसर महेन्द्र कुमार गर्ग ने बताया कि देश के सबसे बड़े बायो गैस प्लांट में सोमवार से ठोस व जैविक तरल खाद व गैस का उत्पादन शुरू हो गया है। इससे हम 1200 घरों की पूरी कॉलोनी की गैस सप्लाई कर रहे है, जो एशिया में सबसे बड़ी बायो गैस आधारित कॉलोनी है। इससे बनने वाली खाद से हाड़ौती भर की डीएपी खाद को जरूरत जैविक खाद से पूरी हो सकेगी।
फेक्ट फाइल –
1.देवनारायण योजना में 1200 पशुपालक परिवार के 5 हजार सदस्य
2.पशु पालकों से एक रुपए किलो खरीद रहे गोबर3. गोबर से 2 से 20 हजार रुपए रुपए प्रतिमाह कमा रहे
4.प्रतिदिन 21 टन फॉस्फेट रिच आर्गेनिक फर्टिलाइजर बनाने में सक्षम
5. प्रतिदिन एक लाख लीटर जैविक तरल खाद बनाने की क्षमता
6. तीन हजार लीटर कम्प्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) बनाने की क्षमता7. जैविक खाद से खेतों में फॉस्फोरस की कमी होगी दूर