कोटा. पूर्वीवती सरकार ने विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के ऐन वक्त पहले कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) लागू कर दिया है। इसमें शामिल गांवों की जमीन लेकर भाजपा के जनप्रतिनिधियों ने केडीए का विरोध किया। ऐसे अब इसकी क्रियान्विति कैसे होगी, इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं। उधर कोटा और बूंदी जिले के किसान केडीए के लिए एक इंच भी जमीन देने को तैयार नहीं है। दोनों जिलों के किसान संगठन लगातार किसानों को इस संबंध में जागरुक कर रहे हैं। नई सरकार के लिए केडीए गलफांस बनता नजर आ रहा है।
केडीए का दायरा दोनों जिलों की सात विधानसभा क्षेत्र तक पहुंच गया है। लाडपुरा, सांगोद पंचायत समिति समेत बूंदी जिले की केशवराय पाटन व तालेड़ा पंचायत समिति के 289 गांवों की करीब 2.20 लाख एकड़ भूमि का विलय शहरी क्षेत्र के लिए हो जाएगा। इसके चलते कोटा का कुल क्षेत्रफल 2.03 एकड़ से बढ़कर 4.23 लाख एकड़ हो जाएगा। केडीए के ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि भूमि में विस्तार को लेकर किसान व भाजपा-कांग्रेस के जनप्रतिनिधि से लेकर ग्रामीण तक विरोध कर रहे हैं।
बढ़ेगा दायरा
कोटा में वर्ष 1971 में नगर विकास न्यास की स्थापना हुई। उस समय शहर की जनसंख्या 2.13 लाख थी। वर्ष 2011 में शहर की जनसंख्या 10,01,694 लाख और क्षेत्रफल 38 हजार एकड़ हो गया। इसके बाद तेजी से कोटा का विकास हो रहा है। कोटा की वर्तमान अनुमानित जनसंख्या 13 लाख 81 हजार से अधिक पहुंच चुकी है। वर्ष 2031 तक जनसंख्या के 21 लाख के पार पहुंचने की संभावना है। ऐसे में कोटा को यूआईटी से केडीए बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है। इसके लिए जिले की पंचायत समिति लाड़पुरा, बून्दी जिले के केशवराय पाटन एवं तालेड़ा पंचायत समिति क्षेत्र समेत आसपास के 289 गांवों को शहरी सीमा में शामिल किया गया है। वर्तमान में यूआईटी का शहरी दायरा 2,03,125 एकड़ है। केडीए बनने के साथ ही इसमें कोटा के आसपास के क्षेत्र की 2,20,127 एकड़ भूमि का विस्तार हो जाएगा और कोटा में केडीए का क्षेत्रफल बढ़कर 4,23,252 एकड़ हो जाएगा। जो कोटा के वर्तमान क्षेत्रफल से दोगुने से भी अधिक है।
भूमाफियाओं की जमीन पर नजर
ग्रामीणों ने कहा कि केडीए के बहाने भूमाफियाओं की नजरें गांव की जमीन पर है। क्षेत्र के केडीए में शामिल होने का असर उनके दैनिक जीवन और आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा। जिसके गंभीर परिणाम होंगे।
जनप्रतिनिधि जा चुके हैं विरोध
कांग्रेस नेता भरत सिंह ने भी केडीए के गठन को कोटा के पर्यावरण के लिए गलत ठहराते हुए इसका विरोध किया था। उनका कहना है कि लोग इसके खिलाफ है। उन्होंने केडीए पर सवालिया निशान लगाते हुए आखिर कोटा में विकास प्राधिकरण की मांग किसने की थी। बूंदी के पूर्व विधायक अशोक डोगरा भी विरोध जता चुके है। पूर्व विधायक रामनारायण मीणा भी विरोध में थे। लाडपुरा विधायक कल्पना देवी ने भी आपत्ति दर्ज करवाई थी।
तालेड़ा के भाजपा नेता अनिल जैन का कहना है कि केडीए के बूंदी की तालेड़ा व केशवराय पाटन का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। यहां कृषि भूमि समाप्त होने से किसानों की भूमि उनसे छीन जाएगी। साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अधिकार भी छीन जाएंगे। इसके अलावा पर्यावरणीय नुकसान भी होंगे।
किसान नेता दशरथ कुमार ने बताया कि केडीए में माध्यम से किसानों की जमीने छीनने की तैयारी है। किसान इसके लिए एक इंच भी जमीन नहीं देंगे। लगातार आंदोलन किया जा रहा है। भाजपा सरकार के समक्ष किसान अपनी मांगें रखेंगे।