
rape in express train in katni
कोटा. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में की गई टिप्पणी कि प्रीमियम रेलगाडिय़ों में फ्लैक्सी फेयर सिस्टम लागू होने से कम यात्रियों ने सफर किया। इस किराया प्रणाली के अनुसार लोग ट्रेन की तुलना में विमान में यात्रा करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इस पर रेलवे ने विश्लेषण किया तो पाया कि रेलवे की ओर से राजधानी एक्सप्रेस, दूरंतो एक्सप्रेस और शताब्दी श्रेणी की एक्सप्रेस ट्रेनों में फ्लैक्सी फेयर प्रणाली लागू करने से फ्लैक्सी फेयर अवधि में 1500 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय अर्जित की गई।
रेलवे ने फ्लैक्सी फेयर से अप्रेल 2018 से जून 2018 तक 265 करोड़ रुपए और अप्रेल 2017 से मार्च 2018 तक 864 करोड़ रुपए अतिरिक्त कमाए। वहीं सितम्बर 2016 से मार्च 2017 तक 371 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व अर्जित किया।
रेलवे सूत्रों के अनुसार सितम्बर 2016 से जून 2018 के बीच फ्लैक्सी फेयर अवधि और गैर फ्लैक्सी फेयर अवधि की तुलना में फ्लैक्सी फेयर वाली गाडिय़ों में बुक किए गए यात्रियों की संख्या में 1.37 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। गैर फ्लैक्सी फेयर अवधि में 52.32 मिलियन यात्रियों ने सफर किया और फ्लैक्सी फेयर वाली अवधि में 53.4 मिलियन यात्रियों ने सफर किया। इस इस तरह 1.37 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज की गई।
तनाव में कार्य कर रहे स्टेशन मास्टर
कोटा. यात्रियों की संरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों का सुरक्षित संचालन करने के लिए रेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय संरक्षा कोष की स्थापना की है। इसके तहत पांच साल के लिए 1 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान रखा है। हर साल 20 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस साल जून 2018 तक 3256 करोड़ रुपए संरक्षा बढ़ाने के लिए किए गए कार्यों पर खर्च हो चुके हैं।
राष्ट्रीय संरक्षा कोष गठन के बाद भी स्टेशन मास्टर संवर्ग का तनाव संरक्षा को चुनौती दे रहा है। जिन स्टेशनों से दिनभर ट्रेनों का परिचालन होता है, वहां दो स्टेशन तैनात करने की जरूरत है, लेकिन एक ही स्टेशन मास्टर से कार्य कराया जा रहा है। कुछ स्टेशनों पर तो स्टेशन मास्टर्स 12 घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं, जो संरक्षा मापदंडों के अनुकूल नहीं है। इतना ही नहीं कई स्टेशनों पर स्टेशन मास्टर ट्रेनों के परिचालन के साथ टिकट बांटने का कार्य भी कर रहे हैं, इससे संरक्षा का सुरक्षा चक्र भंग हो रहा है। केशवरायपाटन स्टेशन से आठ घंटे 60 ट्रेनें गुजरती हैं। शाम के पांच बजे इस स्टेशन पर टिकट बांटने के लिए बुकिंग क्लर्क भी तैनात नहीं है। इस कारण स्टेशन मास्टर को सिग्नल देने के साथ टिकट भी बांटने पड़ते हैं।
Published on:
13 Aug 2018 07:00 am
