
आपातकाल में जिंदगी बचाने को नहीं है दूसरा रास्ता
Expose: स्मार्ट सिटी कोटा विकास के पथ पर अग्रसर है, लेकिन कई मामलों में नियम-कायदे पीछे छूटते जा रहे हैं। शहर में बड़े-छोटे भूखंडों पर बहुमंजिला इमारतें खड़ी होती जा रही हैं। इनमें होटल, हॉस्टल, अस्पतालों व अन्य संस्थानों का संचालन किया जा रहा है। इन बहुमंजिला इमारतों में से 90 प्रतिशत में फायर फाइटिंग सिस्टम तक नहीं हैं। ये इमारतें बिना फायर एनओसी के ही संचालित हैं। नगर निगम भी पिछले कई सालों से सिर्फ नोटिस देकर ही जिम्मेदारी पूरी कर लेता है।
ऐसे में जबलपुर जैसा अग्निजनित हादसा हो जाए तो इन इमारतों में बचाव का कोई जरिया नहीं है। इन इमारतों में आपातकाल में जीवन बचाने के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं हैं। राजस्थान पत्रिका ने बुधवार को कई बहुमंजिला इमारतों का जायजा लिया तो चौंकाने वाली स्थिति नजर आई।
यह भी पढ़ें: Video: कॉलोनी में घुसा 6 फीट लम्बा मगरमच्छ, मचा हड़कम्प
विद्यार्थियों की जिंदगी से खिलवाड़
शहर में बहुमंजिला इमारतों में अधिकतर में हॉस्टल चल रहे हैं। इनमें देशभर के कोचिंग विद्यार्थी आकर रहते हैं। इनमें से अधिकतर में आने-जाने का एक ही रास्ता है। फायर फाइटिंग सिस्टम तक नहीं है। कभी आगजनी हो जाए तो इन इमारतों में आपातकालीन निकास के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। हॉस्टल संचालक विद्यार्थियों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। नगर निगम नोटिस देकर इतिश्री कर लेता है। होना तो यह चाहिए कि इनके खिलाफ एनबीसी (नेशनल बिल्ंिडग कोड) एक्ट की पालना नहीं करने पर सीज की कार्रवाई हो।
इन क्षेत्रों में रहते हैं 1.50 लाख विद्यार्थी
शहर में हर साल करीब डेढ़ लाख से अधिक बच्चे कोचिंग करते आते हैं। इस साल यह आंकड़ा दो लाख के पार हो गया। 90 प्रतिशत विद्यार्थी हॉस्टल में रह रहे हैं। शहर में जवाहर नगर, तलवंडी, राजीव गांधी नगर, इंद्र विहार, विज्ञान नगर, दादाबाड़ी, महावीर नगर के अलावा नदी पार क्षेत्र के लैंडमार्क सिटी और बारां रोड पर कोरल पार्क बड़ी संख्या में विद्यार्थी रहते हैं। अधिकतर हॉस्टल छोटे भूखंडों पर कई मंजिलों तक बनें हैं। आपात स्थिति में निकलने के लिए रास्ता तक नहीं हैं। इनमें से अधिकतर ने बिना फायर एनओसी के ही संचालन कर रखा है।
यह भी पढ़ें: फूफी ससुर ने विधवा का अपहरण कर किया बलात्कार
पहले भी हो चुकी घटनाएं
पूर्व में बारां रोड, लैण्डमार्क सिटी व तलवंडी के हॉस्टल्य में आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। यहां निकासी की आपातकालीन व्यवस्था नहीं होने से बच्चों को पहली-दूसरी मंजिल से छलांग लगनी पड़ी थी। आग लगने की घटनाओं के बाद निगम की ओर से अभियान चलाकर बहुमंजिला इमारतों का सर्वे किया गया था। सर्वे में पाया था कि अधिकतर इमारतों में न तो फायर एनओसी थी, न ही फायर फाइटिंग सिस्टम लगा था।
यह भी पढ़ें: Video: दुस्साहस: बजरी माफिया ने पुलिसकर्मी के हाथ-पैर तोड़े
सीज करने की कार्रवाई कर रहे
नगर निगम कोटा दक्षिण में करीब 500 हॉस्टल संचालकों को नोटिस जारी कर रखा है। पिछले एक साल में 2 होटल, 1 हॉस्टल, 1 रेस्टोरेंट व एक मॉल को सीज करने की कार्रवाई की। कुछ संचालकों ने एनओसी भी ली है। निगम की ओर से दो कर्मचारी हॉस्टलों के निरीक्षण व नोटिस देने के लिए ही लगा रखे हैं। जिन बहुमंजिला इमारतों में एक ही निकास है, उनकी भी पड़ताल करवा रहे हैं।
- राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण
यह भी पढ़ें: अपहरण कर डेढ़ माह तक किया बलात्कार, बालिका दस्तयाब
सर्वे करवाकर कार्रवाई की जाएगी
नगर निगम कोटा उत्तर में आने वाले सभी हॉस्टलों व बहुमंजिला इमारतों का सर्वे करवाने के मुख्य अग्निशमन अधिकारी को निर्देश दे दिए हंै। जिन संचालकों ने फायर एनओसी नहीं ले रखी या सुरक्षा उपकरण की कमी पाई जाती है तो उचित कार्रवाई की जाएगी।
- मंजू मेहरा, महापौर नगर निगम कोटा उत्तर
Updated on:
04 Aug 2022 12:03 pm
Published on:
04 Aug 2022 11:59 am
