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Iran-US War Impact: अमरीका-ईरान जंग का किसानों पर तगड़ा असर, चावल निर्यात ठप, धान की बंपर आवक, गिरे दाम

Rajasthan News: अमरीका-ईरान तनाव का असर अब हाड़ौती के किसानों पर भी दिखने लगा है। बासमती चावल का निर्यात ठप होने से दो दिन में ही दामों में भारी गिरावट आई है, जिससे धान के भाव भी लुढ़क गए हैं। मंडियों में बंपर आवक के बीच किसान और निर्यातक दोनों चिंता में हैं।

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कोटा

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Akshita Deora

Mar 02, 2026

Rice Exports In Kota

फोटो: पत्रिका

US-Iran War Impact On Farmers: ईरान पर अमरीका और इजरायल के सैन्य हमलों का सीधा असर हाड़ौती से निर्यात होने वाले चावल पर भी पड़ा है। हाड़ौती से बासमती चावल खाड़ी देशों में निर्यात किया जाता है। ईरान के मौजूदा हालात से चावल का निर्यात ठप हो गया है।

इससे चावल के दामों में दो दिन में ही दस हजार रुपए प्रति टन की गिरावट आ गई है। इसका असर धान के भावों पर भी पड़ने लगा है। चावल निर्यातकों का कहना है कि ईरान के सबसे बड़े बंदरगाह बंदर अब्बास के रास्ते ईरान या अफगानिस्तान जाने वाली खेप रुक गई है। स्थिति सुधरने तक ये खेप फंसी रहेगी, जिससे बाजार प्रभावित होगा। भुगतान में भी देरी हो सकती है।

80 फीसदी चावल होता है निर्यात

हाड़ौती में उत्पादित 80 फीसदी चावल का ईरान और खाड़ी देशों में निर्यात होता है। चावल पोर्ट पर अटका पड़ा है, जो माल पोर्ट से जहाजों में लोड हो गया, वह भी बीच में अटक गया है, इससे निर्यातक परेशान हैं। निर्यात ठप होने से धान (कच्चा माल) और चावल के दामों पर असर आया है।

कोटा में धान के भावों में दो दिन में ही 500 से 600 रुपए प्रति क्विंटल की मंदी आ गई है। हाड़ौती के बासमती चावल की दुनियाभर में मांग है, सबसे ज्यादा डिमांड़ खाड़ी देशों में होती है। ईरान, ईराक, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में यहां का बासमती काफी पसंद किया जाता है।

राजस्थान में धान उत्पादन में कोटा संभाग अव्वल

प्रदेश में धान उत्पादन में कोटा संभाग पहले नम्बर पर आता है। प्रदेश के कुल धान उत्पादन में हाड़ौती की 70 फीसदी हिस्सेदारी है। ऐसे में दाम गिरने का असर भी यहां ज्यादा दिख रहा है। कोटा और बूंदी की मंडियों में धान की इन दिनों बंपर आवक हो रही है, दाम गिरने से किसान परेशान हैं और फिलहाल धान को मंडियों में लाने से बच रहे हैं।

ईरान में तनावपूर्ण हालात होने से बासमती चावल का निर्यात ठप हो गया है। बासमती चावल के दाम 10 हजार रुपए प्रति टन गिर गए हैं। नए सौदे अटक गए हैं। चावल पोर्ट पर ही अटका हुआ है। चावल निर्यातक परेशान हैं। हाड़ौती से 80 फीसदी बासमती चावल निर्यात होता है, जो पूरी तरह बंद हो गया है। इससे निर्यातकों के अलावा किसानों को भी नुकसान हो रहा है।नीलेश पटेल, राइस एक्सपोर्टर

फैक्ट फाइल

  • 1.78 लाख हैक्टेयर में बुवाई
  • 09 लाख मीट्रिक टन उत्पादन
  • 70 फीसदी उत्पादन प्रदेश का कोटा संभाग में
  • 80 फीसदी बासमती चावल होता है निर्यात
  • 2500-3200 प्रति क्विंटल धान के औसत दाम