
कोटा . कोटा के हॉस्टल्स में कोचिंग छात्रों की जिंदगी के साथ खुलेआम खिलवाड़ हो रहा हैं। बहुमंजिला छात्रावासों के बेसमेंट में धड़ल्ले से 8 से 10 गैस सिलेंडर रखकर खाना पकाया जा रहा है। इन रसोइयों के साथ ही अटैच डाइनिंग हॉल भी हैं, लेकिन बेसमेंट से बाहर जाने का सिर्फ एक ही रास्ता है। एग्जॉस्ट फैन की बात तो दूर इन इमारतों में आग बुझाने तक का कोई इंतजाम नहीं है। कोई हादसा हो जाए तो बच्चों का सुरक्षित बाहर निकलना तो दूर यहां दो मिनट सांस तक नहीं ले पाएंगे।
हॉस्टल्स और पीजी के लिए 19 बिंदुओं वाली गाइड लाइन जारी करते समय जिला प्रशासन और पुलिस ने बेसमेंट में किचन बनाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। उसके बाद पुलिस और अग्रिशमन विभाग ने छापेमार कर ऐसे हॉस्टलों से किचन बाहर निकलवाए, लेकिन रसूखदार लोगों के हॉस्टल्स की न तो जिला प्रशासन और ना ही अग्रिशमन विभाग एवं पुलिस ने कभी जांच की। नतीजन कोटा हॉस्टल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन मित्तल समेत तमाम पदाधिकारियों और भाजपा जिला महामंत्री जगदीश जिंदल के हॉस्टल जिंदा सिलेंडर बम बन चुके हैं।
आशीर्वाद रेजीडेंसी-1/2 - राजीव गांधी नगर
सुरक्षा: दो प्लॉटों पर छह-छह मंजिला इमारत को मिलाकर गल्र्स हॉस्टल चलाया जा रहा है। जिसकी निगरानी के लिए 16 सीसीटीवी कैमरे लगे थे, लेकिन इनमें से 5 बंद पड़े हुए थे। हॉस्टल के गार्ड पवन ने बताया कि यहां नाइट अटेंडेंस नहीं होती। किसी भी कमरे में एंटी सुसाइड डिवाइस वाला पंखा नहीं लगा।
किचन: दोनों हॉस्टल्स की लड़कियों का खाना बेसमेंट में स्थित किचन में बनता है। इस किचन में 5 कॉमर्शियल और 2 डॉमेस्टिक सिलेंडर रखे हुए थे। अग्निशमन इंतजामों के बारे में पूछने पर गार्ड पवन हमें किचन के स्टोर में ले गया। जहां अलमारी के अंदर आग बुझाने वाला सिलेंडर दिखाने लगा, लेकिन सिलेंडर पर एक्सपाइयरी डेट 8 अप्रेल 2017 पड़ी हुई थी। खराब सिलेंडर रखने की वजह पूछने पर वह चुप्पी साध गया। उसने बताया कि दोनों इमारतों में फिलहाल आग बुझाने वाला एक भी सिलेंडर नहीं है। सारे सिलेंडर रिफिल करने के लिए भेजे गए हैं। इसी बीच हॉस्टल के संचालक और कोटा हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन मित्तल भी आ गए। उन्होंने बताया कि आग बुझाने का फिलहाल हॉस्टल में कोई इंतजाम नहीं है। उन्होंने बताया कि दोनों हॉस्टल्स में फिलहाल 60-70 लड़कियां रह रही हैं।
आग बुझाने के साधन नहीं
जिंदगी एक प्राथमिकता फाउंडेशन की डायरेक्टर एडवोकेट ईशा यादव ने बताया कि जिन लोगों के कंधे पर व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी है उनके हॉस्टल्स के बेसमेंट में ही किचन चल रहा है। 5-6 मंजिला इमारतों में भी आग बुझाने का कोई साधन नहीं है। सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे। नाइट अटेंडेंस नहीं हो रही। बायोमेट्रिक मशीन भी नहीं है। तो बाकी हॉस्टल वाले कानून की पालना क्यों करेंगे। गाइड लाइन बनाने वाले अग्निशमन विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस ने इन्हें एनओसी कैसे दे दी और कभी इन हॉस्टलों के खिलाफ कार्रवाई करना तो दूर जांच तक नहीं की गई, यह बड़ा सवाल है।
Updated on:
11 Jan 2018 11:19 pm
Published on:
10 Jan 2018 07:22 am
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