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Rajasthan: कोटा जिले में तैनात कांस्टेबल 2 महीने रहा लापता, पुलिस विभाग को नहीं लगी भनक, अचानक आधी रात पहुंचा थाने

Kota Constable Case: डीएसपी रुद्रप्रकाश शर्मा ने बताया कि जांच में यह पता लगाया जाएगा कि कांस्टेबल इस अवधि में कहां रहा, उसने ड्यूटी जॉइन क्यों नहीं की और आइजी कार्यालय में पेश क्यों नहीं हुआ।

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कोटा

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Kamal Mishra

Apr 22, 2026

Kota constable suspended

कांस्टेबल मनीष चौधरी (फाइल फोटो-पत्रिका)

कोटा। उद्योग नगर थाने में तैनात एक कांस्टेबल को लगातार गैरहाजिर रहने और विभागीय निर्देशों की अवहेलना करने के कारण निलम्बित कर दिया गया है। सिटी एसपी तेजस्विनी गौतम ने शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करते हुए कांस्टेबल मनीष चौधरी को निलंबित कर दिया। विभागीय सूत्रों के अनुसार, संबंधित कांस्टेबल पिछले करीब दो माह से बिना किसी सूचना के ड्यूटी से गायब था।

गंभीर बात यह सामने आई कि इस दौरान कांस्टेबल मनीष चौधरी कहीं भी कार्यरत नहीं था और उसकी लोकेशन या गतिविधियों की जानकारी न तो संबंधित उद्योग नगर थाने को थी, न ही आइजी कार्यालय को। इस लापरवाही को विभाग ने गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए तत्काल प्रभाव से निलम्बन की कार्रवाई की।

24 फरवरी से लापता कांस्टेबल

एसपी तेजस्विनी गौतम ने बताया कि कांस्टेबल को 24 फरवरी को कोटा रेंज आइजी कार्यालय में पेश होने के निर्देश दिए गए थे। वह उद्योग नगर थाने से रिलीव भी हो गया, लेकिन न तो आइजी ऑफिस में उपस्थित हुआ, न ही वापस थाने लौटा। इस तरह करीब दो महीने तक उसकी गैरहाजिरी बनी रही।

अचानक आधी रात थाने पहुंचा

इधर, निलम्बन की सूचना मिलने के बाद कांस्टेबल मनीष चौधरी देर रात करीब 1 बजे उद्योग नगर थाने पहुंचा और अपनी आमद दर्ज कराने की कोशिश की। हालांकि, ड्यूटी पर मौजूद अधिकारी ने उसकी आमद लेने से इनकार कर दिया और उसे उच्चाधिकारियों के निर्देशों का पालन करने को कहा। मामले की जांच डीएसपी रुद्रप्रकाश शर्मा को सौंपी गई है।

जांच के बाद होगी कार्रवाई

डीएसपी रुद्रप्रकाश शर्मा ने बताया कि जांच में यह पता लगाया जाएगा कि कांस्टेबल इस अवधि में कहां रहा, उसने ड्यूटी जॉइन क्यों नहीं की और आइजी कार्यालय में पेश क्यों नहीं हुआ। विस्तृत जांच रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी।

पहले भी सामने आ चुके ऐसे मामले

यह कोई पहला मामला नहीं है, जब कोई पुलिसकर्मी ड्यूटी से लंबे समय तक गैरहाजिर रहा हो। इससे पहले भी वर्ष 2023 में एक ऐसा ही मामला सामने आया था। उस समय लाड़पुरा विधायक कल्पना देवी के पूर्व गनमैन जितेंद्र सिंह करीब चार साल तक ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हुआ, फिर भी वह नियमित रूप से वेतन लेता रहा। बाद में जब पूरे मामले की जानकारी विभागीय अधिकारियों को मिली, तो तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे निलंबित कर दिया गया और विस्तृत जांच शुरू की गई।

दोषी मिलने पर गई थी नौकरी

जांच के दौरान वह दोषी पाया गया, जिसके बाद उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। पुलिस विभाग के सूत्रों के अनुसार, ऐसे और भी कुछ मामले सामने आ सकते हैं, जहां पुलिसकर्मी वास्तव में कहां कार्यरत हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी किसी के पास नहीं है, फिर भी वे वेतन प्राप्त कर रहे हैं। इस तरह की घटनाएं विभागीय निगरानी और अनुशासन व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।