
...यहां सवा पांच लाख रुपए की सोफ्टी तो आठ लाख रुपये के पकोड़े खा जाते हैं एक ही दिन में
कोटा. दशहरा मेला खाने के शौकीन लोगों को खूब रास आ रहा है। मेले में हर रोज करीब सवा 29 लाख रुपए अलग-अलग तरह के व्यंजन लोग चट कर जाते हैं। शनिवार व रविवार छुट्टी के दिन मेले में बिकवाली और बढ़ जाती है।
चाट के लगा रहे चटकारे
मेले में चाट का भी बाजार है। पानी पताशे महंगे होने के बावजूद लोग इनका जमकर चटकारा ले रहे हैं। वहीं चाट भी खूब भा रही है। मेले में हर रोज तीन से साढ़े तीन लाख रुपए की चाट व करीब दो लाख रुपए के पानी पताशे की बिकवाली हो रही है।
पंजाबी व साउथ इंडियन डिश
मेले में पंजाबी व साउथ इंडियन डिश भी लोगों को खूब भा रहे हैं। पनीर टिक्का, चिल्ली पनीर, पनीर जलेबी, छोले भटूरे व पाव भाजी की अच्छी बिकवाली है। साउथ इंडियन डिश में डोसा भी रास आ रहा है। दोनों की करीब चार लाख रुपए से अधिक की बिकवाली हर रोज हो रही है।
पांच लाख की तो सोफ्टी ही
कोटा दशहरे मेले की स्पेशलिटी मानी जाने वाली सोफ्टी की करीब दो दर्जन से अधिक दुकानों पर लोग हर रोज सवा पांच लाख रुपए की सोफ्टी खा जाते हैं। दुकानदारों ने बताया कि पहले 10 रुपए की सोफ्टी का ही चलन ज्यादा था, लेकिन अब मेले में 20 व 30 रुपए की विभिन्न फ्लेवरों की सोफ्टी की भी अच्छी मांग है। वनीला के बाद चॉकलेट फ्लेवर ज्यादा बिक रहा है।ा
स्ट फूड पहली पसंद
दशहरे मेले में दुकानों पर परम्परागत डिशों के अलावा चाउमीन, बर्गर, पिज्जा, सेंडविच, केक, पेस्ट्री, पेटीज की भी जमकर ब्रिकी हो रही है। सबसे ज्यादा चाउमीन व बर्गर पसंद किए जा रहे हैं। इनकी करीब तीन लाख रुपए रोज की बिकवाली हो रही है& दशहरे मेले में खाने पीने के स्टॉलों पर अच्छी बिकवाली हो रही है। मेले में दो लाख लोग एक साथ आसानी से आ सकते हैं। प्रतिदिन मेले में एक लाख से ज्यादा लोग आ रहे हैं। खाने-पीने की वस्तुओं की गुणवत्ता की जांच सीएमएचओ की ओर से की जाती है। मेले में आवंटित दुकानदारों के पास फूड लाइसेंस है।
जुगलकिशोर मीणा, आयुक्त, नगर निगम, कोटा।
Published on:
04 Nov 2018 06:51 pm
