
डीसीएम रोड स्थित मैसर्स अराफात पेट्रोकैमिकल प्राइवेट लिमिटेड (जेके फैक्टरी) फोटो: पत्रिका
KDA Big Action: कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) ने मंगलवार को उद्योग नहीं चलाने, श्रमिकों का भुगतान नहीं करने तथा जमीन की लीज डीड की शर्तों की पालना नहीं करने पर मैसर्स अराफात पेट्रो कैमिकल प्राइवेट लिमिटेड (जेके फैक्टरी) की कोटा की करीब 227 एकड़ जमीन अपने कब्जे में ली है।
भारी पुलिस जाप्ते के साथ प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में अराफात समूह की चारों औद्योगिक इकाइयां तथा आवासीय कॉलोनी की जमीन अधिगृहीत कर केडीए ने ’यह सम्पति कोटा विकास प्राधिकरण की है’ के जगह-जगह बोर्ड लगा दिए। अराफात पेट्रो कैमिकल प्राइवेट लिमिटेड के बोर्ड हटा दिए गए। अराफात कॉलोनी में श्रमिक, समूह के मालिक रहते हैं, इस कारण इसे सीज नहीं किया गया है।
फैक्टरी की चारों इकाइयों पर केडीए ने ताला लगाकर सीज कर दिया। सरकार इस जमीन का क्या उपयोग करेगी, यह फिलहाल तय नहीं हुआ है। जेके करीब 28 साल पहले बंद हुई थी और 2007 में अराफात समूह ने यह फैक्टरी खरीदी थी, जब से फैक्टरी बंद पड़ी है।
सुबह करीब सवा 11 बजे जिला प्रशासन, जिला उद्योग विभाग और केडीए की टीम भारी पुलिस जाप्ते के साथ डीसीएम रोड अराफात कॉलोनी के गेट पर पहुंची और यहां केडीए की सम्पत्ति का बोर्ड लगाया, इसके बाद कॉलोनी में जगह-जगह बोर्ड लगा दिए गए। इसके बाद सभी फैक्टरीज को सीज कर दिया गया। यह कार्रवाई दोपहर 2 बजे तक जारी रही।
मैसर्स अराफात पेट्रो कैमिकल प्राइवेट लिमिटेड को उद्योगों की स्थापना के लिए 2007 में राज्य सरकार की ओर से अलग-अलग 7 लीज स्वीकृत की गई थी। इसके तहत कंपनी को राज्य सरकार की ओर से उद्योग संचालन के लिए रियायती दर पर भूमि दी गई थी। योजना के अनुसार कंपनी को एक साल में ही उद्योग शुरू करना था, लेकिन 18 वर्ष का समय बीतने के बाद भी कंपनी की ओर से उद्योग का संचालन नहीं किया गया।
अराफात कंपनी के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय की ओर से 20 अप्रेल 2023 को दिए गए निर्णय में भी कंपनी की ओर से रीको से करवाए गए उप-विभाजन को अवैध करार दिया गया था।
कोटा में जेके सिंथेटिक्स की 1960 के दशक में स्थापना की गई। यह फैक्टरी सिंथेटिक फाइबर, नायलॉन और पॉलिएस्टर बनाती थी। इसने कोटा व प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की, लेकिन आर्थिक परेशानियों के चलते 1997 में जेके की चारों इकाइयां एक-एक कर बंद हो गई।
कंपनी की ओर से लंबे समय से लगातार उद्योग का संचालन नहीं किया जा रहा था। कंपनी की ओर से श्रमिकों का पूर्ण भुगतान नहीं करने एवं उनका शोषण करने की शिकायतों को देखते हुए राज्य सरकार ने राज्यहित और जनहित में कंपनी को जारी की गई सभी 7 लीज निरस्त करते हुए कब्जा वापस ले लिया गया है।
राज्य सरकार ने हाल ही में अतिरिक्त जिला कलक्टर की अध्यक्षता में लाडपुरा एसडीएम, जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक, रीको के उप महाप्रबंधक, संयुक्त श्रम आयुक्त की एक कमेटी बनाई थी। फैक्टरी प्रबंधन इस कमेटी को उद्योग संचालन के संबंध में कोई दस्तावेज नहीं दे पाया। कमेटी ने माना की प्रबंधन ने मशीनरी को खुर्द-बुर्द कर दिया है। लीज-डीड की शर्तों का उल्लंघन किया है। रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने अपने कब्जे में लेना जनहित में उचित माना।
मामला सुप्रीम कोर्ट में जाने और कोर्ट की ओर से रीको की वैधानिकता पर सवाल उठाए जाने के बाद राज्य सरकार ने रीको को शक्तियां प्रदान करने के लिए राजस्थान लैंड रेवेन्यू (अमेंडमेंट वैलिडेशन) बिल-2025 विधानसभा के बजट सत्र में पेश किया था। बिल पास होने से रीको को हस्तांरित किए गए औद्योगिक क्षेत्र की जमीनों के भूपरिवर्तन, ट्रांसफर एवं विभाजन की शक्तियां मिल जाती, लेकिन सदन में विपक्ष की ओर से जोरदार विरोध और कोटा की एक जमीन को बचाने के लिए रीको को अपार शक्तियां दिए जाने का मामला उठा था। इसके बाद यह बिल प्रवर समिति को भेज दिया गया था।
कुशल कुमार कोठारी, सचिव केडीए
फैक्टरी परिसर - 227.15 एकड़
भूमि की कीमत - 2500 करोड़
जेके श्रमिक - 4200
जेके श्रमिकों का बकाया - 500 करोड़
फैक्टरी को जारी कुल लीज - 7
जेके में कुल इकाइयां - 4
Published on:
25 Jun 2025 09:18 am
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