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Kota University : कागजों में ‘दावों का मैदान, बगीचे में कराए खेल

कुलपति सचिवालय के सामने बगीचे में शुरू हुआ वार्षिक खेलकूद सप्ताह एकेडमिक बिल्डिंग के गार्डन में ही खत्म हो गया।

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Shailendra Tiwari

Apr 05, 2016

kota univarcity

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कुलपति सचिवालय के सामने बगीचे में शुरू हुआ वार्षिक खेलकूद सप्ताह एकेडमिक बिल्डिंग के गार्डन में ही खत्म हो गया। बावजूद इसके कोटा विवि 26800 वर्गमीटर का आउटडोर और 1640 वर्ग मीटर इंडोर खेल मैदान होने का दावा करता है।

लाइब्रेरी में किताबें न होने पर छात्र कई मर्तबा आंदोलन कर चुके हैं, लेकिन विवि प्रशासन के मुताबिक शैक्षणिक सत्र 2012-13 से 14-15 तक डेढ़ करोड़ की किताबें खरीदी गईं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह तमाम दावे राष्ट्रीय स्तर पर रैंक हासिल करने के लिए किए हैं।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय और यूजीसी ने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की राष्ट्रीय स्तर पर रैंक तैयार करने के लिए गत वर्ष सितंबर से दिसंबर के बीच आवेदन मांगे थे।

नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) पोर्टल के जरिए कोटा विवि ने भी इसके लिए आवेदन किया।

जिसमें छात्रों को मुहैया कराई जा रही सुविधाओं के बारे में विवि ने दावा किया है कि शैक्षणिक सत्र 2013-14 में उनके पास 6800 वर्ग मीटर आउटडोर और 900 वर्ग मीटर इंटोर खेल मैदान की सुविधा उपलब्ध कराई गई।

जबकि शैक्षणिक सत्र 2014-15 में इसका आकार बढ़कर 26800 वर्गमीटर आउटडोर और 16400 वर्ग मीटर इंडोर हो गया। यानी इस समय विवि प्रशासन छात्रों को 43200 वर्ग मीटर के खेल मैदान की सुविधा मुहैया करा रहा है।

इतना ही नहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने आवेदन में दावा किया कि किताबें और जर्नल खरीदने के लिए शैक्षणिक सत्र 2012-13 में 17.53 लाख, शैक्षणिक सत्र 2013-14 में 60.50 लाख और शैक्षणिक सत्र 2014-15 में 75.19 लाख रुपए खर्च किए।

वहीं इन तीन सालों में 26.53 लाख रुपए ई-बुक और ई-जर्नल पर खर्च किए गए। लैब सुविधाएं उन्नत बनाने के लिए 682.25 लाख और उनके मेंटीनेंस व सुरक्षा पर 20.95 लाख रुपए खर्च किए गए।

विवि की सफाई

एनआईआरएफ की संयोजक और कोटा विवि की प्रो. आशू रानी से जब इन दावों पर बात की गई तो उन्होंने बताया कि फिजिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने उन्हें यह सूचनाएं दी थीं।

जिसमें डाइट और दूसरे खेल मैदान जिन्हें विवि इस्तेमाल करता है, को भी शामिल किया गया है। हालांकि निर्माणाधीन स्पोट्र्स कॉम्पलेक्स को इसमें शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि लाइब्रेरी पर जो सालाना खर्च दिखाया गया है, वह बजट के मुताबिक है।

हालांकि उन्होंने यह भी माना कि वित्त वर्ष 2014-15 में आवंटित हुआ 75.19 लाख रुपए का बजट अभी पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो सका है। फिलहाल इस बजट से किताबें खरीदने का काम चल रहा है।

विवि को मिली 78वीं रैंक

नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क(एनआईआरएफ) ने विश्वविद्यालयों की रैंक जारी कर दी है। राजस्थान के सात विश्वविद्यालय सौ विश्वविद्यालयों की पहली सूची में जगह बनाने में कामयाब रहे हैं।

बिट्स पिलानी को नौवां स्थान, वनस्थली विद्यापीठ को 29वां, राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय को 34वां, कोटा विश्वविद्यालय को 78 वां, एलएमएनआईटी को 85वां, पदमपति सिंघानिया विवि को 95वां और राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ वैटनरी एंड एनीमल साइंसेज को 97वां स्थान प्राप्त हुआ है। हालांकि अभी दावों की जांच पूरी होना बाकी है।

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