
श्रम विभाग के नोटिस ने भवन मालिकों की उड़ाई नींद
कोटा. कोटा में भवन निर्माण पर लगने वाले सेस को लेकर बकायादारों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2009 या उसके बाद से दस लाख रुपए की लागत से अधिक राशि से निर्मित मकान, हॉस्टल, व्यवसायिक निर्माण आदि के भवन निर्माण पर 1 प्रतिशत लेबर सेस (उपकर) वसूला जा जाता है। इस कर को वसूलने की पहले जिम्मेदारी नगर निगम व यूआईटी की थी, लेकिन बाद में लेबर सेस वसूलने की जिम्मेदारी श्रम विभाग को सौंप दी गई। श्रम विभाग अब शहर में सर्वे कर भवन मालिकों को नोटिस जारी कर लेबर सेस वसूलने की कार्रवाई कर रहा है। विभाग अब तक 4 करोड़ से ज्यादा की वसूली कर चुका है।
3565 भवनों का सर्वे
श्रम विभाग ने वर्ष 2020-21 में 839 भवनों तथा इससे पहले 2952 भवनों यानी कुल 3791 मकानों का सर्वे किया। इनमें से 3565 भवन मालिकों को नोटिस देकर नक्शा, लेआउट व प्लान मांगा गया। कागजात विभाग में दिखाने के बाद भवन निर्माण लागत का निर्धारण किया गया।
410 लोगों ने ही जमा कराया उपकर
श्रम उपायुक्त प्रदीप कुमार झा ने बताया कि वर्ष 20-21 में नोटिस दिए गए 726 में से 69 भवन मालिकों ने 46.78 लाख रुपए उपकर जमा कराया है। इससे पहले दिए नोटिस 2839 में से 341 भवन मालिकों ने 3 करोड़ 57 लाख रुपए जमा कराए है। अभी तक 410 भवन मालिकों ने 403.78 लाख रुपए लेबर सेस जमा कराया है।
भवन मालिक कर रहे विरोध
भवन मालिक नोटिस को लेकर लेबर सेस का विरोध कर रहे है। भवन मालिकों का कहना है कि जब से भवन बना तब से अब तक लेबर सेस पर 24 प्रतिशत ब्याज व पेनल्टी वसूली जा रही है। भवन मालिक ब्याज व पेनल्टी क्यों जमा कराए। पहले निगम व यूआईटी ने सर्वे नहीं किया और अब श्रम विभाग सर्वे कर रहा है तो इसमें भवन मालिकों की गलती नहीं है। इसके विरोध में कोटा व्यापार महासंघ व हॉस्टल संचालकों ने श्रम उपायुक्त व लोकसभा अध्यक्ष को भी ज्ञापन दिया है।
Published on:
27 Feb 2021 10:27 pm
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