कोटा . चुनावी माहौल में पूड़ी पॉलिटिक्स फिर लंच पॉलिटिक्स के बाद अब फार्मर पॉलिटिक्स देखने को मिल रही है। जी हां चुनाव में बीजेपी कांग्रेस दोनों ही दल किसानों को अपने चुनावी एजेंडे में प्रमुखता से शामिल कर रहे है। लोकसभा चुनाव मिशन 25 को लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टी हर दांव पेंच आजमा रही है। विधानसभा 2018 में दोनों ही दलों में कुछ इन्ही आजमाइशों को देखा गया। कार्यकर्ताओ को लुभाया था अब किसानो की बारी है यही वजह है की चुनावी सभा में दोनों बड़ी पार्टियों के नेता सभा में किसानो को खुश करने की बात कह रहे है है।
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कोटा में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल ने भी अपने संबोधन में किसानो के हित में कांग्रेस का हाथ रहने के साथ चुनावी घोषणा पत्र जारी करते हुए कहा की कांग्रेस सरकार आई तो किसानों का अलग से budget जारी किया जाएगा। वही भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रदेश के सहप्रभारी अविनाश राय खन्ना ने भी अपने संबोधन में किसानो पर ही फोकस रखा ।
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यानि लोकसभा चुनाव के मुद्दों में किसानो पर दोनों ही पार्टी डोरे डालने में लगी है विधानसभा चुनाव में किसानो की नाराजगी भाजपा को भारी पड़ गई। ऐसे में अब जहां कांग्रेस लोकसभा चुनाव में भी किसानो के मुद्दों को लेकर जीत हांसिल करना चाहती है वही भाजपा अपनी ग़लती को दोहराने से बच रही है। लेकिन दोनों ही पार्टियों द्वारा किसानों को लुभाने की चर्चा इन दिनों लोगो के बीच खासी गर्म है सियासी माहौल में फार्मर पोलटिक्स कितना असर दिखती है यह देखने वाली बात होगी