
कोटा में निजी बसों के लिए स्थायी ठिकाना तो बनाओ सरकार
कोटा.
राज्य के तीसरे बड़े शहर कोटा में निजी बसों के संचालन के मामले में व्यवस्था नाम की कोई चीज नजर नहीं आ रही। निजी बसों के कारण शहर में बिगड़ रहे हालात प्रशासन व पुलिस के अफसरों ने आंखें मूंद रखी है। लेकिन सुधार की दिशा में कोई कदम नहीं उठाएं जा रहे हैं। ऐसे में बस संचालक बेलगाम बने हुए हैं। बस संचालक न केवल अपनी मनमर्जी से बसों का संचालन कर रहे हैं, बल्कि आम राहगीरों व यात्रियों की परेशानी बढ़ाने से भी नहीं चूक रहे। कोटा के लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से निजी बसोंं के संचालन की व्यवस्था सुधारनी चाहिए। मनमर्जी से बसें चलाने के ढर्रे को सुधारना चाहिए।
फैक्ट-
-700 से करीब निजी बसें कोटा में हैं।
-250 से ज्यादा बसें देर शाम के बाद शहर की सड़कों व कई चौराहों के यातायात को करती है प्रभावित
-ऐसे बिगड़े हैं हाल:
-कोटा शहर से निजी बसों के संचालन पर पुलिस व प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं, है। आम राहगीर हो रहे हैं परेशान
-मनमर्जी से कहीं से भी खड़ी हो रही है निजी बसें, सुगम यातायात में बन रही है बाधा
-सरकारी बस स्टैण्ड के बाहर कई बसें एक साथ खड़ी हो जाने से आए दिन बन रहे जाम के हालात।
यह होना चाहिए सुधार-
-कोटा शहर में निजी बसों के लिए स्थायी बस स्टैण्ड बनाया जाएं।
-बसों के स्टॉपेज के स्थान तय किए जाएं। मनमर्जी से हर जगह बसें नहीं रोकी जाएं।
-जहां बसें रूक रही है, वहां यात्रियों की सुविधाएं विकसित हो।
-हर रोड पर जगह-जगह से यात्रियों को बैठाने की अव्यवस्था पर अंकुश लगे।
अव्यवस्था के लिए ये हैं जिम्मेदार-
बस ऑपरेटर्स
जिला प्रशासन
यातायात पुलिस
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Published on:
27 Mar 2022 09:55 pm
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