
मौसम का फाइल फोटो: पत्रिका
IMD Weather Forecast Report: कोटा जिले में मौसम विभाग की बारिश संबंधी भविष्यवाणियां लगातार गलत साबित हो रही हैं। पिछले 7 दिनों से जिले में बारिश का यलो अलर्ट जारी किया जा रहा है लेकिन अधिकांश दिन और रात बिना बारिश के ही गुजर रहे हैं। इससे आमजन के साथ-साथ किसानों में भी मौसम विभाग की सटीकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
जयपुर मौसम केन्द्र के वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार अल-नीनो का प्रभाव मानसून पर साफ दिखाई दे रहा है। मानसून से जुड़े जो भी सिस्टम सक्रिय हुए वे पर्याप्त नमी लेकर नहीं आए। नमी की कमी के कारण सिस्टम कमजोर बने रहे और अपेक्षित बारिश नहीं हो सकी। यही वजह है कि बार-बार अलर्ट जारी होने के बावजूद कोटा समेत राजस्थान के कई जिलों में अच्छी वर्षा नहीं हो पाई। मानसून की बेरुखी के कारण खरीफ फसलों पर संकट गहराने लगा है। खेतों में पर्याप्त वर्षा नहीं होने से किसान फसलों को बचाने के लिए नहरों के पानी और ट्यूबवेल का सहारा लेने को मजबूर हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसलों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है।
जानकारी के अनुसार कोटा में 2 जुलाई को मध्यप्रदेश की ओर से झालावाड़ के रास्ते मानसून ने प्रवेश किया था। हालांकि इसके बाद मानसून की सक्रियता कोटा में मजबूत होने के बजाय भीलवाड़ा होते हुए उदयपुर की ओर खिसक गई। इससे हाड़ौती क्षेत्र में व्यापक बारिश की उम्मीदें पूरी नहीं हो सकीं। कोटा शहर तो सूखा रहा।
इधर मौसम विभाग ने अगले पांच से छह दिनों तक मौसम के मुख्य रूप से शुष्क बने रहने की संभावना जताई है। हालांकि 13 से 15 जुलाई के बीच जयपुर, भरतपुर और शेखावाटी के कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है। वहीं 14 और 15 जुलाई को बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और चूरू में कहीं-कहीं बूंदाबांदी के आसार हैं। इस अवधि में कहीं-कहीं हल्के बादल छाने की स्थिति बन सकती है लेकिन व्यापक और अच्छी बारिश की संभावना फिलहाल कम बताई जा रही है। ऐसे में किसानों की निगाहें अब मानसून की अगली सक्रियता पर टिकी हैं, ताकि फसलों को समय पर पर्याप्त पानी मिल सके।
Updated on:
13 Jul 2026 07:11 am
Published on:
13 Jul 2026 07:08 am
