कोटा. वन्यजीव प्रेमियों के लिए खास खबर है। मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व में करीब 10 महीनों से विचारण कर रहे मुकुन्दरा के शहंशाह व गत माह रणथंभौर से आई सुल्ताना के बीच अब दोस्ती हो गई है। दोनों लंबी दूरियों को पाटकर आखिर आसपास आ ही गए। गत दिनों से दोनों के बीच दूरियां बनी हुई थी और इनके बीच दोस्ती होने का बेसब्रसी से इंतजार किया जा रहा था। हालांकि पिछले तीन चार दिनों से इनके बीच की दूरियां कम होने लगी थी।
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अब दो दिनों से दोनों को साथ साथ देखा जा रहा है। विभाग के अधिकारी भी इसे भविष्य के अच्छे संकेत मान रहे हैं। जानकारी के अनुसार आने वाले चार से पांच माह के अंतराल में नई बहार आने की संभावनाएं भी बढ़ी है। गत दिनों से दोनों के बीच दूरियां बनी हुई थी और दोनों ने एक दूसरे को देखा तक भी नहीं था। सुल्ताना को 82 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में स्वच्छंद विचरण के लिए गत माह एनक्लोजर कादरवाजा खोल दिया गया था। इसके बावजूद जंगल में दोनों के बीच दूरियां बनी हुई थी।
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विभाग के अधिकारियों के मुताबिक एम टी-1 व एमटी -2 को साथ साथ देखा जा रहा है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार पिछले दो तीन दिन से बाघ बाघिन एक दूसरे के साथ भ्रमण कर रहे हैं। टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर घनश्याम शर्मा के अनुसार दोनों में आपस में टकराव जैसी कोई बात नहीं है। दोनों को आराम से साथ में भ्रमण करते देखा जा रहा है।
एक माह बाद मिले
मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व में रणथंभौर से गत माह 18 दिसम्बर को बाघिन सुल्ताना को लाकर 18 कर रात मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व में दरा क्षेत्र में 28 हैक्टेयर के एनक्लॉजर में शिफ्ट किया गया था, बाद में 22 दिसम्बर को इसे 82 वर्ग किलोमीटर के जंगल में विचरण के लिए एनक्लोजर से बाहर लाने के इसका दरवाजा खोल दिया गया था, इसके बावजूद यह इससे बाहर नहीं आई। बाहर आने के बाद भी बाघ और बाघनि दोनों का मूवमेंट अलग अलग रहा। इनके बीच कभी 5 किलोमीटर की कभी चार किलोमीटर की दूरी बनी रही। पिछले तीन चार दिनों में एक ही इलाके में इनकी मौजूदगी रही और अब ये साथ साथ विचरण कर रहे हैं।
जल्द आए दूसरी जोड़ीदार
योजना के तहत टाइगर रिजर्व में एक ओर बाघिन को लाकर शिफ्ट किया जाना है। एक ओर जोड़ीदार फरवरी के मध्य तक आने की संभावनाएं व्यक्त की जा रही है। टाइगर रिजर्व के ही अधिकारियों के मुताबिक 82 वर्ग किलोमीटर के विस्तार के बाद यहां 15-20 बाघ बाघिन रह सकते हैं। विभाग की योजना के तहत 82 वर्ग किलोमीटर के दायरे को 200 वर्ग किलोमीटर तक बढ़ाया जाना है।