
भूमि की प्रतीकात्मक तस्वीर: पत्रिका
3-Phase Electric Locomotive In Kota: कोटा शहर के काला तालाब क्षेत्र में कोटा रेल मंडल की करीब 8 हैक्टेयर भूमि पर 500 थ्री-फेज विद्युत इंजनों की क्षमता का अत्याधुनिक विद्युत लोको शेड बनाया जाएगा। करीब 490 करोड़ रुपए की इस महत्वाकांशी योजना से कोटा को देश के प्रमुख रेल इंजन केन्द्र के रूप में पहचान मिलेगी। इसके साथ ही हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। इसके लिए कोटा रेल मंडल की ओर से बोर्ड को प्रस्ताव भेजे गए हैं।
कोटा रेलवे को इस योजना से महत्वपूर्ण परिचालन और तकनीकी केंद्र के रूप पहचान मिलेगी। प्रस्तावित लोको शेड के निर्माण से कोटा की रणनीतिक रेल स्थिति मजबूत होगी तथा पश्चिम एवं मध्य भारत के बीच रेल परिचालन को नई गति मिलेगी। इसके चलते कोटा में ही इंजनों के अनुरक्षण, मरम्मत और तैनाती की सुविधा उपलब्ध होने से रेल संचालन अधिक तेज, सुगम एवं समयबद्ध हो सकेगा। साथ ही, इंजनों को दूरस्थ लोको शेड तक भेजने में लगने वाले समय एवं संसाधनों की भी बड़ी बचत होगी।
कोटा रेल मंडल की भौगोलिक स्थिति इस परियोजना के लिए बेहद उपयुक्त है। मथुरा-नागदा खंड पर प्रस्तावित तीसरी एवं चौथी रेल लाइन, रामगंजमंडी-भोपाल नई रेल लाइन परियोजना तथा क्षेत्र के बड़े तापीय विद्युत संयंत्रों, सीमेंट प्लांटों, खाद व उर्वरक उद्योगों के कारण इस रूट पर गुड्स ट्रेन एवं विद्युत इंजनों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। इसके चलते भविष्य में रेल यातायात और माल परिवहन की मांग में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
कोटा दिल्ली-मुम्बई रेलवे लाइन पर प्रमुख रेलवे स्टेशन है। अब इसे अन्तरराष्ट्रीय तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना से कोटा देश के प्रमुख रेल इंजन केंद्रों में शामिल हो जाएगा। परियोजना से रेल संचालन अधिक व्यवस्थित होगा और क्षेत्र के युवाओं के लिए तकनीकी एवं अन्य क्षेत्रों में रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे।
कोटा दिल्ली-मुम्बई रेलवे लाइन पर प्रमुख रेलवे स्टेशन है। अब इसे अन्तरराष्ट्रीय तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना से कोटा देश के प्रमुख रेल इंजन केंद्रों में शामिल हो जाएगा। परियोजना से रेल संचालन अधिक व्यवस्थित होगा और क्षेत्र के युवाओं के लिए तकनीकी एवं अन्य क्षेत्रों में रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे। साथ ही रेलवे से जुड़े सहायक उद्योगों और सेवाओं को भी बढ़ावा मिलेगा।
विद्युत लोको शेड बनने के बाद यात्रियों एवं माल परिवहन दोनों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। स्थानीय स्तर पर इंजनों की उपलब्धता बढ़ने से ट्रेनों के संचालन में परिचालन दक्षता में सुधार होगा। रेलवे नेटवर्क मजबूत होगा तथा ट्रेनों के रखरखाव और संचालन में लगने वाले समय में भी कमी आएगी।
Published on:
10 Jun 2026 07:20 am
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