
कोटा .
घर से लोगों के लापता होने के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार शहर से रोजाना 2 से 3 लोग लापता हो रहे हैं। इनमें महिलाओं व बालिकाओं की संख्या अधिक है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार शहर के सभी थाना क्षेत्रों में इस साल 1 जनवरी से 31 मार्च तक तीन माह की अवधि में 213 लोगों के लापता होने के मामले सामने आए। इनमें महिलाओं व बालिकाओं की संख्या 147 है। इस हिसाब से हर महीने 71 लोग लापता हुए। इनमें से बालिगों के लापता होने पर तो गुमशुदगी दर्ज की गई और नाबालिगों के मामलों में मुकदमे दर्ज किए गए।
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तीन नाबालिगों को किया तलाश
शहर पुलिस ने पिछले सालों में लापता हुए तीन नाबालिगों को तलाश कर उनके परिजनों से मिलाया। रेलवे कॉलोनी थाना क्षेत्र से जून 2012 में लापता 17 साल की किशोरी को 6 साल बाद मुम्बई से दस्तयाब किया गया। मकबरा थाना क्षेत्र से वर्ष 2012 से लापता 15 साल के किशोर को पुलिस ने मेरठ से तलाश किया। इसी तरह उद्योग नगर थाना क्षेत्र से एक साल पहले लापता हुए 10 साल के बालक को तालेड़ा क्षेत्र से दस्तयाब किया गया|
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पुरुषों से दोगुनी महिलाएं लापता
इस साल के शुरुआती तीन माह में कुल 187 महिला-पुरुष लापता हुए हैं। इनमें से पुरुषों की संख्या 60 और महिलाओं की 127 है। यानी पुरुषों से दोगुनी महिलाएं लापता हुई हैं।
बालिकाओं की संख्या तो तीन गुना तक
इस साल के शुरुआती तीन माह में मार्च तक 26 नाबालिगों के गुमशुदा होने पर मुकदमे दर्ज किए गए। इनमें से 6 बालकों की तुलना में बालिकाओं की संख्या 3 गुना से भी अधिक 20 है।
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मानव तस्करी विरोधी यूनिट निरीक्षक राजेन्द्रसिंह कवैया ने बताया कि शहर में लापता होने वालों की संख्या निश्चित रूप से लगातार बढ़ रही है, लेकिन इस साल जितने गुमशुदगी व मुकदमे दर्ज हुए पुलिस व मानव तस्करी विरोधी यूनिट की टीम ने उनसे अधिक 214 को तलाश भी किया है। तलाश किए गए लोगों में गत वर्षों में गुमशुदा भी शामिल हैं। शेष की तलाश जारी है।

Published on:
13 Apr 2018 04:15 pm
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