सांसों में घुल रहा फ्लोराइड
शोध के दौरान पता चला कि थर्मल प्लांट में इस्तेमाल होने वाले पत्थर के कोयले के जलने पर फ्लोराइड का उत्सर्जन हो रहा है। फ्लोराइडयुक्त धुआं न केवल वायुमंडल, बल्कि आसपास की मिट्टी, जलस्त्रोतों, पेड़ पौधों और फसलों को भी दूषित कर रहा। लंबे समय तक धुएं के संपर्क में रहने वाले लोग फ्लोरोसिस के शिकार हो रहे। डॉ. चौबीसा ने इसे नाइबरहुड फ्लोरोसिस नाम दिया।