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मंत्री को पीड़ा बताते हुए रो पड़े अन्नदाता, बोले 1000 रुपए देते ही उड़द तो क्या मिट्टी भी खरीद लेते हैं पर्यवेक्षक

कोटा. केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के समक्ष आहत किसान अपनी पीड़ा रखते हुए रो पड़े।

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कोटा

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abhishek jain

Nov 08, 2017

Rajasthan Agriculture Minister Meet Farmers

कोटा . केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के समक्ष हाड़ौती के अन्नदाताओं के आंसू झलक पड़े। उपज का कम दाम मिलने से आहत किसानों ने खुलकर मंत्री के सामने अपनी पीड़ा रखी। किसानों ने उड़द की खरीद में चले रहे घालमेल के बारे में मंत्री को आड़े हाथों लिया। साथ ही उलाहना दिया कि सरकारी कर्मचारी, खरीद केंद्र के पर्यवेक्षकों को हजार रुपए देते ही उड़द क्या मिट्टी भी खरीद लेते हैं। पैसे नहीं देने पर गुणवत्ता का बहाना कर उड़द को नापास कर देते हैं।

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किसानों की बात सुनने के बाद मंत्री ने कहा कि वह खुद किसान के बेटे हैं, पीड़ा जानते हैं। अगर कोई कर्मचारी खरीद में गड़बड़ी करने वाले एक भी कार्मिक को नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान को उपज का पूरा दाम मिलना चाहिए। अगर इसमें अधिकारी या व्यापारी दोनों में से कोई भी लापरवाही करेगा तो सीधा जेल जाएगा। उसे कोई भी नहीं बचा सकता।

भामाशाहमंडी में शेखावत बुधवार को हाड़ौती के प्रगतिशील किसानों से रूबरू हो रहे थे। इस दौरान किसानों ने अपने-अपने क्षेत्र की समस्या बताएं रखी और उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने की मांग रखी। केन्द्रीय मंत्री ने किसानों के एक-एक सवाल पर जवाब दिया। किसान अपनी बात कहते हुए बिफर भी गई। सांसद ओम बिरला को बीच-बीच में दखल करना पड़ा और उन्होंने किसानों को शांत किया।

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किसानों ने यह बताई समस्याएं

अर्जुनपुरा के किसान अमरलाल गहलोत ने कहा कि सरकार किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाने की बात कहती है। यह मंडियां कोई राशन की दुकान नहीं, जो किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाएंगे। हमें उपज का लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए।

धुलेट के सरपंच नरोत्तम शर्मा ने कहा उड़द खरीद में ऐसी धांधलियां चल रही है। जिसका कोई जवाब नहीं। राजफेड के अधिकारी पहले तो उड़द के नमूनों को फेल कर देते हैं। बाद में 1000 रुपए जेब डालते ही धूल भरी उड़द को भी पास कर खरीद लेतेे है। जिनकी शिकायत करें तो खरीद में आना कानी करते हैं। शिकायत भी नहीं कर सकते।

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हाड़ौती किसान यूनियन के महामंत्री दशरथ कुमार ने कहा कि आपके पास केंद्रीय कृ़षक कल्याण मंत्रालय की जिम्मेदारी है। अभी तक भी बैनर पर राज्य मंत्री लिखा हुआ है। पहले अपना पद तो सही करवा लो। जहां तक पद नाम सहीं होगा किसानों का कल्याण नहीं हो सकता।

प्रदेश में उड़द की 30 हजार मीट्रिक टन उड़द खरीद का लक्ष्य केंद्र सरकार ने निर्धारित किया है। जबकि हाड़ौती में तीन लाख से अधिक मीट्रिक टन उड़द का उत्पादन हुआ है। खरीद केंद्रों पर कागजी कार्रवाई से बचने के लिए किसानों को मजबूरी में एमएसपी से सस्ते दामों में मंडियों में उड़द बेचनी पड़ी। इससे कोटा संभाग के किसानों को 140 करोड़ का नुकसान हुआ। इसकी केंद्र सरकार को भरपाई करनी चाहिए।

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खेड़ली तंवरान के किसान अभय ङ्क्षसह ने कहा कि उड़द, मूंग खरीद में किसानों के सामने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की बंदिश लगा दी। ऐसे में किसान सारे कागजात लेकर ईमित्रों पर चक्कर काटता रहा। एक माह बाद उसे उड़द बेचने का टोकन मिला। किसान को रुपए की जरूरत तो तत्काल है। उपज एक माह बाद बिकेगी। जिसका भुगतान एक सप्ताह बाद मिलेगा। खरीद में पारदर्शिता बरतने के नाम पर किसानों को उलझाने से कोई फायदा नहीं हैं।

भारतीय किसान संघ के प्रदेश मंत्री जगदीश शर्मा ने कहा कि दसवीं पास लड़के उड़द के नमूने पास करने में लगा रखे हैं। जिन्हें यह भी पता नहीं कि किस क्वालिटी का उड़द खरीदना चाहिए।

भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश मंत्री मुकुट नागर ने कहा कि सरकार द्वारा गेहूं के समान ही उड़द व अन्य दलहनों की समर्थन मूल्य पर खरीद करनी चाहिए। ताकि किसान बिना किसी परेशानी के उपज बेच सके।

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खजूरी के वार्ड पंच बनवारीलाल सुमन ने कहा कि किसानों को पांच घंटे बिजली मिल रही है। जबकि अन्य पड़ौसी राज्यों में 12 घंटे थ्रीफेज बिजली मिल रही है। प्रदेश के किसानों को भी 12 घंटे बिजली मिलनी चाहिए।

कनवास के गिर्राज सिंह ने कहा कि किसानों को विद्युत कनेक्शन के लिए 10 साल से चक्कर काटना पड़ रहा है। वहीं उद्योगों के लिए 24 घंटे में कनेक्शन जारी कर दिए जाते हैं। कृषि विद्युत कनेक्शन पर लगाई गई पाबंदी हटाई जानी चाहिए।

किसान प्रतिनिधि पन्नालाल मीणा ने कहा कि भामाशाह मंडी में गत वर्ष धर्मकांटे लगे थे। इसके वाजूद भी अभी तक मंडी में 70 साल पुरानी व्यवस्था चली आ रही है। बाट-तराजू से उपज की तुलाई हो रही है।