कोटा. शारदीय नवरात्रा की धूम देश मे मची हुई हैं। आस्था का सैलाबउमड़ा हुआ है प्राचीन मंदिरो मे विशेष पूजा अर्चना के दौर चल रहे है कोटा मे माॅ भगवती की आस्था का केंद्र बना हुआ है आशापाला माता का मंदिर…
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माॅ भगवती के नो रूपो की पूजा नवरात्रा मे आस्था के साथ चल रही है अम्बे को प्रसन्न करने के लिए हर प्रयास भक्त कर रहे है। भक्तो की आस्था के कारण ही कोटा मे आशा पाला माता के मदिर की प्रसिद्धि साल दर साल बढती जा रही है। 17वी ईस्वी ने इस मंदिर की स्थापना राजपरिवार ने एक तस्वीर और त्रीशुल के साथ की थी बाद मे राजपूत शासको ने ही मंदिर को भव्य स्परूप प्रदान किया । आशापाला माता चौहान वंशजो की कुल देवी है राजस्थान मे आठ दस स्थानो पर आशापाला माता के मंदिर बने हुए है।
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कोटा मे आशा पाला माता मे भक्तो की प्रगाढ आस्था है हर शुभ कार्यो की शुरूवात आशा पाला माता मंदिर मे पूजा के साथ होती है। कोटा राष्ट्रीय दशहरा मेले की शुरूवात से पहले आज भी राजपरिवार के सदस्य आशापाला माता की पूजा करके खुशहाली की कामना करते है।
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वैसे भले ही राजपूत समाज आशापुरा माता को कुलदेवी के रूप् मे पूजता हो लेकिन आशापाला माता के प्रति कोटा के लोगो की आस्था अमिट है हर समाज और हर वर्ग आशापाला के मंदिर मे मनोकामना लेकर पहुचता है और उनकी मनोकामनाए भी पुरी होती है । नवरात्रा मे नो दिनो तक मदिर मे भक्तो का ताता लगा रहता है।
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माना जाता है कि आशापाला मंदिर मे साक्षात देवी निवास करती है। पूजा अर्चना के साथ नवरात्रा स्थापना यहां विधिवत तरिके से होती हे। माॅ की अराधना के साथ भैरव को भी पूजा जाता है। क्योकि माँ अम्बे ने ही भैरव को वरदान दिया था …कि मेरी पूजा तब ही पूर्ण मानी जाएगी…जब तेरी पूजा होगी।