
कोचिंग को कोटा से जयपुर शिफ्ट करने की गहलोत की कोशिश से सन्न रह गई शिक्षा नगरी, पेट्रोलियम इंजीनियरिंग पर संकट
कोटा. कोटा से आईआईटी ( Kota Coaching ) छीनने के बाद जयपुर में अटकी ट्रिपल आईटी ( Triple it kota ) हो या फिर राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय ( Rajasthan Technical University ) को जयपुर शिफ्ट करने के असफल प्रयास के बाद अब कोचिंग हब को जयपुर और पेट्रोलियम इंजीनियरिंग ( Petroleum Engineering ) की पढ़ाई को जोधपुर ले जाने की कोशिश होती दिख रही है। वर्ष 2009 में केंद्र सरकार ने कोटा में आईआईटी स्थापित करने की घोषणा की थी। प्रशासन को कोटा में आईआईटी स्थापना के निर्देश मिले तो मार्च 2009 में रानपुर में 323.33 हैक्टेयर भूमि की अवाप्ति की अधिसूचना जारी कर दी गई, लेकिन गहलोत सरकार ( CM Ashok gehlot ) इसे कोटा से जोधपुर ले गई। इसके बाद वर्ष 2011 में कोटा को ट्रिपल आईटी की सौगात मिली, लेकिन 9 साल बाद भी इसकी कक्षाएं कोटा में नहीं लग पाई हैं। ( Triple it kota) आरटीयू, कोटा के अफसरों ने फरवरी 2019 में विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ढांचे को जयपुर में शिफ्ट करने का प्रयास किया। राजस्थान पत्रिका ने जब इसका खुलासा किया तब सरकार बैकफुट पर आई।
कोचिंग जयपुर शिफ्ट करने की कोशिश
विधान सभा में बजट पेश करते मुख्यमंत्री ने जैसे ही जयपुर के प्रताप नगर में 65 हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल में कोचिंग हब स्थापित करने की घोषणा की तो कोटा के लोगसन्न रह गए। अर्थशास्त्री डॉ. गोपाल सिंह ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि दुनिया भर में कोटा कोचिंग का डंका बज रहा है। कोटा की इस पहचान को और मजबूती देने के लिए कोचिंग संस्थान लंबे समय से सरकार से कोटा में इस बाबत विशेष सुविधाएं देने की मांग कर रहे थे, लेकिन उन्हें अनदेखा कर जयपुर में नए सिरे से कोचिंग हब स्थापित किए जाने की कोशिश ने कोटा की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। डॉ. सिंह ने कहा कि जब भी सरकार इस तरह के विशेष जोन स्थापित करती है तो वहां आने वाले कारोबारियों को टैक्स में छूट से लेकर रियायती दरों पर भूखंड और कई सुविधाएं मिलती है। जयपुर के बजाय यदि कोचिंग हब स्थापित करने के लिए कोटा को तरजीह मिलती तो कोटा कोचिंग इंडस्ट्रीज एक हजार करोड़ का आंकड़ा पार कर सकती थी।
आरटीयू के छात्रों की उम्मीदों पर पानी
राजस्थान में पेट्रोलियम के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं को देखते हुए आरटीयू ने वर्ष 2011 में पेट्रोलियम इंजीनियरिंग और वर्ष 2013 में पेट्रो केमिकल इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम शुरू किया था। हर साल दोनों ही पाठ्यक्रमों में बीटेक की 30-30 सीटें न सिर्फ पूरी भरीं बल्कि प्लेसमेंट के मामले में भी यह विभाग आगे रहा। सियासी दवाब के चलते वर्ष 2015 में इस विभाग का वजूद मिटाने के लिए सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में जोड़कर महज एक ब्रांच बना दिया गया। इस डिपार्टमेंट के लिए बनाया भवन भी छीन लिया। अब मुख्यमंत्री ने जोधपुर के एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज में पेट्रोलियम के क्षेत्र में शोध एवं उच्च अध्ययन की राह खोलने के लिए 20 करोड़ रुपए की घोषण की है। वहां विश्वविद्यालय स्तरीय शैक्षणिक सुविधाएं देने की घोषणा कर आरटीयू के छात्रों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
Published on:
21 Feb 2020 07:30 am
