
Heeralal Nagar: कोटा में बैठक करते ऊर्जी मंत्री हीरालाल नागर (फोटो-पत्रिका नेटवर्क)
कोटा। राजस्थान के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर की मौजूदगी में रविवार को कोटा जिला परिषद सभागार में उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई, जब विकास कार्यों की समीक्षा बैठक के दौरान अचानक बिजली गुल हो गई। करीब छह मिनट तक बिजली नहीं आने पर मंत्री और अधिकारी अंधेरे में ही बैठक करते रहे। घटना से अधिकारियों में अफरा-तफरी मच गई। बाद में कर्मचारियों ने दौड़कर जनरेटर चालू किया, जिसके बाद बिजली आपूर्ति बहाल हो सकी। इस घटना पर ऊर्जा मंत्री ने नाराजगी जताते हुए विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए।
जानकारी के अनुसार, रविवार दोपहर जिला परिषद सभागार में सांगोद विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों की समीक्षा बैठक चल रही थी। बैठक में जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ विद्युत निगम के अधिकारी भी मौजूद थे। इसी दौरान अचानक बिजली चली गई। बिजली गुल होते ही कुछ अधिकारी बिजली निगम के कर्मचारियों से संपर्क करने लगे, जबकि कुछ कर्मचारियों ने सभागार के पर्दे हटाकर प्राकृतिक रोशनी की व्यवस्था की। इस बीच तीन-चार कर्मचारी तुरंत जनरेटर कक्ष तक पहुंचे और उसे चालू कर बिजली आपूर्ति बहाल कराई।
कोटा में हुई बैठक के दौरान बिजली गुल होने पर ऊर्जा मंत्री ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान सिंचाई के कारण बिजली की मांग बढ़ जाती है, ऐसे में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्युत निगम के अधिकारियों को बिजली व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने और आपूर्ति सुचारू रखने के निर्देश दिए।
बैठक में ऊर्जा मंत्री ने सांगोद विधानसभा क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने गांवों में श्मशान घाटों तक पहुंचने वाले रास्तों और वहां उपलब्ध सुविधाओं पर विशेष जोर दिया। अधिकारियों को निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में किसी भी गांव से ऐसी स्थिति सामने नहीं आनी चाहिए कि अंतिम संस्कार तिरपाल के नीचे करना पड़े। उन्होंने हर गांव में श्मशान घाट तक पक्का और सुगम रास्ता बनाने तथा टीन शेड के स्थान पर आरसीसी मॉडल से स्थायी निर्माण कराने के निर्देश दिए।
ऊर्जा मंत्री ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों को टालने की प्रवृत्ति तुरंत बंद होनी चाहिए। बेहतर मॉनिटरिंग के लिए तीन-तीन ग्राम पंचायतों का क्लस्टर बनाकर कनिष्ठ अभियंताओं की जिम्मेदारी तय करने और उन्हें संबंधित पंचायत मुख्यालय पर नियमित रूप से बैठने के निर्देश दिए।
उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने को कहा। मंत्री ने निर्देश दिए कि इंटरलॉकिंग और सीसी सड़कों के साथ मजबूत 'वी-शेप' पत्थर की नालियां बनाई जाएं, ताकि बारिश के दौरान जल निकासी बेहतर हो और सड़कें लंबे समय तक सुरक्षित रह सकें।
बैठक में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कमल कुमार मीणा, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी सरिता सिंह, सांगोद प्रधान जयवीर सिंह अमृतकुआं, सुल्तानपुर प्रधान कृष्णा शर्मा, उपप्रधान ओम नागर अडूसा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। वहीं इससे पहले ऊर्जा मंत्री ने कुराड़िया कलां गांव में आयोजित एक कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया, जहां ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया और उन्होंने सामुदायिक भवन निर्माण का आश्वासन भी दिया।
Updated on:
19 Jul 2026 08:21 pm
Published on:
19 Jul 2026 08:17 pm
