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Boxing Champion: राजस्थान की बेटी अरुंधती का कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड पंच, परिजनों की आंखों से छलक पड़े खुशी के आंसू

Arundhati Chaudhary gold medal: राजस्थान की बेटी अरुंधति के स्वर्ण पदक जीतते ही बूंदी रोड स्थित उनके आवास पर खुशी का माहौल बन गया। पूरे परिवार की आंखें खुशी से छलक उठीं। परिजनों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी और आतिशबाजी कर जश्न मनाया।
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कोटा

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Anil Prajapat

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अभिषेक गुप्ता

Aug 02, 2026

Arundhati Chaudhary gold medal-1

अरुंधति के स्वर्ण पदक जीतते ही खुशी से झूम उठे परिजन। फोटो: पत्रिका

कोटा। शनिवार को शिक्षा नगरी की पहचान कुछ देर के लिए कोचिंग नहीं, बल्कि अरुंधति चौधरी बन गई। शहर में हर जुबान पर एक ही दुआ थी-'बेटी गोल्ड जीतकर तिरंगा लहराए।' शाम ढलते ही लोग घरों में टीवी के सामने जुट गए। मुकाबले के दौरान अरुंधति के हर पंच के साथ धड़कनें तेज होती रहीं। जैसे ही रेफरी ने उनके गोल्ड मेडल जीतने की घोषणा की, घर तालियों, खुशी के नारों और बधाइयों से गूंज उठा। परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।

बूंदी रोड स्थित अरुंधति के घर में चाचा दिनेश चौधरी, भाई-बहन और अन्य परिजनों ने भी घर के मंदिर में विशेष पूजा कर जीत की कामना की। उधर, नयापुरा स्थित जेके पैवेलियन बॉक्सिग प्रशिक्षण केंद्र, जहां से अरुंधति ने अपने खेल जीवन की शुरुआत की थी, वहां भी उत्साह चरम पर रहा। कोच, युवा बॉक्सर और खेल प्रेमी सामूहिक रूप से मुकाबला देखने पहुंचे। कोच अशोक गौतम ने कहा, 'यह सिर्फ अरुंधति की नहीं, पूरे कोटा और देश की जीत है।'

अरुंधति के स्वर्ण पदक जीतते ही बूंदी रोड स्थित उनके आवास पर खुशी का माहौल बन गया। चाचा, बड़ी बहन, छोटे भाई सहित पूरे परिवार की आंखें खुशी से छलक उठीं। परिजनों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी और आतिशबाजी कर जश्न मनाया। पड़ोसी और शुभचिंतक भी बड़ी संख्या में घर पहुंचे और परिवार को बधाई दी। खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों ने मैच का लाइव प्रसारण देखा। जीत की घोषणा होते ही घर से लेकर बाजार तक भारत माता के जयकारे गूंज उठे। खिलाड़ियों ने तिरंगा लहराकर जीत का जश्न मनाया और आतिशबाजी कर मिठाइयां बांटी। समाजसेवी डॉ. दुर्गाशंकर सैनी, योगेश सुमन, मांगीलाल, नरेन्द्र नागर समेत अन्य लोगों ने आतिशबाजी की।

दोनों हाथों में प्लेट, एड़ी में फ्रैक्चर… फिर भी नहीं रुकी

कोच अशोक गौतम ने कहा कि अरुंधति की सफलता के पीछे लंबा संघर्ष है। बॉक्सिग के दौरान दोनों कलाइयों में गंभीर चोट आई और ऑपरेशन के बाद प्लेट डालनी पड़ी। एड़ी में फ्रैक्चर भी हुआ, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। सबसे कठिन समय तब आया जब पेरिस ओलंपिक क्वालीफायर के दौरान उनकी मां आईसीयू में भर्ती थीं। मानसिक तनाव के बावजूद उन्होंने रिंग में उतरकर देश के लिए पूरी ताकत से मुकाबला किया।

विश्वास हुआ सच… बेटी गोल्ड लेकर आएगी

बूंदी रोड स्थित अरुंधति के घर में सुबह से ही पूजा-अर्चना का दौर चलता रहा। उनकी मां सुनीता चौधरी, जो इन दिनों अस्वस्थ हैं, बेटी के बॉक्सिंग ग्लव्स हाथ में लेकर उसकी जीत के लिए लगातार प्रार्थना करती रहीं। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास था कि बेटी गोल्ड लेकर आएगी। अरुंधती की जीत के साथ ही उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। कई लोगों ने ढोल बजाकर और आतिशबाजी करके भी अपनी खुशी जताई। सभी लोगों को सुनीता ने मुंह मीठा कराकर ही भेजा। पूरे शहर में भी लोगों में उत्साह और जश्न का माहौल देखा गया।

पिता बोले… जो कहा, वो कर दिखाया

पिता सुरेश चौधरी ने बताया कि जब अरुंधति करीब 15 वर्ष की थी तो उन्होंने उसे आइआइटी की तैयारी करने की सलाह दी थी। तब उसने कहा था, 'आपकी बेटी भारत के लिए गोल्ड जीतने वाली पहली लड़की बनेगी। शनिवार को उसने अपना वादा निभा दिया। बहन डॉ. चारुलता चौधरी ने बताया कि पिता हर बड़े मुकाबले के दौरान व्रत रखते हैं और जीत के बाद ही व्रत खोलते हैं। इस बार भी वह भीलवाड़ा में कुलदेवता के दर्शन और पूजा के लिए गए हुए थे।

10 महीने में 6 स्वर्ण पदक

पिछले दस महीनों में अरुंधति ने लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए फेडरेशन कप, यूथ वर्ल्ड कप, राष्ट्रीय चैंपियनशिप, बॉक्सो कप इंटरनेशनल, एशियन चैंपियनशिप और अब कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर अपने सुनहरे सफर को नई ऊंचाई दी।

पढ़ाई में अव्वल, सेना में सूबेदार

अरुंधति खेल के साथ पढ़ाई में भी हमेशा उत्कृष्ट रहीं। उन्होंने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से स्नातक किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर भारतीय सेना में भर्ती हुई और वर्तमान में सूबेदार के पद पर सेवाएं दे रही हैं। बहन डॉ. चारुलता के अनुसार अरुंधती को खाने में दाल-बाटी-चूरमा बेहद पसंद है लेकिन अपनी कठिन डाइट प्लान के चलते उन्हें काफी समय से यह छोड़ना पड़ा। अब डाइटिशियन की सलाह पर वह एक गिलास गाय का दूध, 10-15 बादाम और संतुलित पौष्टिक आहार लेती हैं।