26 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Success Story: माता-पिता डॉक्टर, लेकिन जुड़वां बेटों को था गणित से प्यार, मां ने छोटी सरकारी जॉब और बेटों ने रच डाला इतिहास

Success Story Of Twin Brothers: इन दोनों भाइयों के माता-पिता पेशे से डॉक्टर हैं। पिता डॉ. मंसूर अहमद खान आईआईटी भुवनेश्वर में मेडिकल इंचार्ज हैं, जबकि माँ डॉ. जीनत बेगम एक सरकारी गायनेकोलॉजिस्ट थीं। आमतौर पर डॉक्टर पेरेंट्स चाहते हैं कि बच्चे भी मेडिकल लाइन चुनें, लेकिन इन दोनों भाइयों को गणित से बेहद लगाव था।

2 min read
Google source verification

कोटा

image

Jayant Sharma

Apr 26, 2026

दोनों भाइयों ने लगभग एक जैसा स्कोर हासिल कर सबको चौंका दिया है।

दोनों भाइयों ने लगभग एक जैसा स्कोर हासिल कर सबको चौंका दिया है।

Twin Brothers Smash JEE Main 2026 with AIR 44 and 58: राजस्थान की कोचिंग सिटी कोटा ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यहाँ केवल सपने देखे ही नहीं, बल्कि जिए और पूरे भी किए जाते हैं। जेईई मेन 2026 के नतीजों में ओडिशा के भुवनेश्वर के रहने वाले दो जुड़वा भाइयों माहरूफ अहमद खान और मसरूर अहमद खान ने अपनी सफलता का परचम लहराया है। इस कामयाबी के पीछे न केवल भाइयों की कड़ी मेहनत है, बल्कि उनकी माँ का एक बड़ा त्याग भी शामिल है।

एयर 44 और 58, एक-दूसरे के हमराह और कॉम्पिटिटर

​माहरूफ और मसरूर की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। दोनों भाइयों ने लगभग एक जैसा स्कोर हासिल कर सबको चौंका दिया है। माहरूफ अहमद खान ने 99.9991350 परसेंटाइल के साथ ऑल इंडिया रैंक 44 प्राप्त की है, जबकि उनके जुड़वा भाई मसरूर अहमद खान ने 99.9984543 परसेंटाइल के साथ 58वीं रैंक हासिल की।

​दिलचस्प बात यह है कि बचपन से ही दोनों भाई एक ही स्कूल, एक ही क्लास और एक ही स्टडी टेबल पर साथ पढ़ते आए हैं। कोटा में भी उन्होंने एक ही कोचिंग संस्थान और बैच में रहकर तैयारी की। वे एक-दूसरे के सबसे बड़े मददगार भी हैं और सबसे मजबूत प्रतिद्वंदी भी।

​ माता-पिता हैं डॉक्टर, लेकिन बेटों का मैथ्स से प्यार

​इन दोनों भाइयों के माता-पिता पेशे से डॉक्टर हैं। पिता डॉ. मंसूर अहमद खान आईआईटी भुवनेश्वर में मेडिकल इंचार्ज हैं, जबकि माँ डॉ. जीनत बेगम एक सरकारी गायनेकोलॉजिस्ट थीं। आमतौर पर डॉक्टर पेरेंट्स चाहते हैं कि बच्चे भी मेडिकल लाइन चुनें, लेकिन इन दोनों भाइयों को गणित से बेहद लगाव था। प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल की वजह से उन्होंने इंजीनियरिंग को चुना और उनके माता-पिता ने भी उनके इस सपने को अपना बना लिया।

​मां का बड़ा बलिदान, करियर छोड़ बनीं बच्चों की ढाल

​इस सफलता की नींव तीन साल पहले रखी गई थी। जब दोनों भाई 9वीं पास कर कोटा आए, तो उनकी मां डॉ. जीनत बेगम ने ओडिशा पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड में अपनी सरकारी डॉक्टर की नौकरी से इस्तीफा दे दिया। वे पिछले 3 साल से कोटा में अपने बेटों के साथ रह रही हैं ताकि उन्हें घर जैसा माहौल और मानसिक संबल मिल सके। पिता भी 1000 किलोमीटर दूर रहकर भी वीडियो कॉल और समय-समय पर कोटा आकर बच्चों का मनोबल बढ़ाते रहे।

​लक्ष्यः आईआईटी बॉम्बे और कंप्यूटर साइंस

​कोटा के मजबूत स्टडी सिस्टम और फैकल्टी की तारीफ करते हुए दोनों भाइयों ने बताया कि उनका अगला लक्ष्य जेईई एडवांस्ड, में भी इसी तरह का प्रदर्शन दोहराना है। दोनों का सपना है कि वे एक साथ आईआईटी बॉम्बे के कंप्यूटर साइंस विभाग में एडमिशन लें। फिलहाल, वे किसी भी जश्न में समय गंवाने के बजाय अपना पूरा ध्यान रिवीजन और मॉक टेस्ट पर लगा रहे हैं।