
मुकेश शर्मा
Rajasthan News : यूं तो भारतीय मुद्रा को विक्रय का किसी को अधिकार नहीं है, लेकिन ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियां न केवल भारतीय मुद्रा के नोट व सिक्कों की खुलेआम कालाबाजारी कर रही हैं, बल्कि इनकी कीमत निर्धारित करते हुए इन नोटों को मूल्य से कई गुना अधिक पर बेचकर कानून का उल्लंघन भी कर रही हैं।
भारतीय मुद्रा में कई छोटे, पुराने नोट और सिक्के प्रचलन से बाहर हो गए हैं। इसके चलते बाजार में इनकी उपलब्धता काफी कम हो गई है। इसी का फायदा उठाते हुए ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियां इन्हें कई गुना दामों पर बाजार में बेच रही हैं। इसके लिए कंपनियां भारतीय कानून की भी परवाह नहीं कर रही। वेबसाइट पर विभिन्न प्रकार के सिक्के और नोटों को उनके निर्धारित मूल्य से कई गुना मूल्य पर बेचा जा रहा है।
बाजार में एक रुपए के नोट की मांग सर्वाधिक है। कंपनियां करीब चार सौ गुना कीमत पर करीब 400 रुपए में इसे बेच रही हैं। दरअसल भारत में शुभ कामों में राशि के साथ एक रुपए देने को शुभ माना जाता है। ऐसे में एक के नोटों की मांग अधिक है। इसके अलावा शगुन या शुभ अवसर पर दिए जाने वाले लिफाफों में भी यह नोट लगाकर ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियां लिफाफे को करीब 400 रुपए में बेच रही है।
भारतीय मुद्रा के पुराने नोट और सिक्कों के साथ ब्रिटिश काल के सिक्के भी ऑनलाइन ऊंचे दामों पर बेचे जा रहे हैं। कई लोग पुराने नोटों को रखने के लिए इनके ऊंचे दाम चुका रहे हैं।
भारतीय मुद्रा के नोट एवं सिक्के के अलावा समस्त रुपए, जिसमें एक रुपए से दस हजार तक का नोट शामिल है। नोटों को निर्गमति करने का एक मात्र अधिकार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को अधिनियम 1934 की धारा 22 के तहत दिया गया है। भारत में किसी भी व्यक्ति को भारतीय मुद्रा को विक्रय करने का कोई अधिकार प्राप्त नहीं है। विधि सम्मत रीति से अनुज्ञा पत्र प्राप्त करके अनुज्ञाधारी विदेशी नागरिकों से उनके देश की मुद्रा प्राप्त करके विदेशी मुद्रा के स्थान पर भारतीय मुद्रा दे सकता है, लेकिन कोई भी व्यक्ति भारतीय मुद्रा बेचने के लिए अधिकृत नहीं है। यदि कोई भी व्यक्ति भारतीय मुद्रा का बेचान करता है तो यह विधि सम्मत नहीं है। आरबीआई के अध्याय पांच में शास्ति का प्रावधान है। इसलिए कोई भी व्यक्ति जो बैंकिंग कार्य का लाइसेंस नहीं रखता है और बैकिंग कार्य करता है, जिसमें रुपए का लेन-देन भी सम्मिलित है, उसका यह कृत्य आरबीआई एक्ट के तहत दंडनीय अपराध है। ऐसे अपराध के लिए तीन वर्ष तक का कारावास और जुर्माने से दंडित करने का प्रावधान है। किसी भी रुपए को उसके मूल्य से अधिक पर बेचना आरबीआई की अवहेलना है। इसलिए इस संबंध में आरबीआई के जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी में ऐसे मामलों को लाकर दोषी कम्पनीज के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
Updated on:
24 Oct 2024 01:14 pm
Published on:
10 May 2024 12:44 pm
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