समारोह में ज्ञान भारती संथान की निदेशक कमला कमलेश ने कहा कि बाबू साहब जब गीत कविता लिखते थे तब मैं नहीं जानती थी कि साहित्य क्या होता है। उनके बाद गिरधारीलाल मालव ने गद्य लेखन को प्रेरित किया। कहानी, लोकगीत, 16 संस्कार के गीत लिखे तो नई पहचान मिली। उन्होंने हाड़ौती में कहा, हाड़ौती आपणी धरोहर छै, जण-जण की भासा बणानी छै।