
मन को नियंत्रित करने की कठोर साधना एतकाफ
कोटा. रमजान में हर दिन हर पल का खास महत्व है। 21वें रमजान से रमजान माह और खास हो जाता है। इसमें कई अकीदतमंद एतकाफ पर चले जाते हैं, यानी बाहरी दुनिया से अलग। अपने आप में झांकने का यह सबसे अच्छा अवसर है।
यातायात पुलिस निरीक्षक अनीस अहमद बताते हैं कि एतकाफ के दौरान रोजेदार मस्जिद में रहकर नमाज, तिलावत, तस्बीह, तस्बीह, तकबीर और गुनाहों से तौबा करते हैं। वे इबादत में इतना डूब जाते हैं कि उन्हें बाहरी दुनिया से कोई लेना देना नहीं रह जाता। एतकाफ दरअसल एक प्रकार से मन पर नियंत्रण रखने की कठोर साधना है।
इसमें व्यक्ति इबादत करते हुए जीवन को संवारता है। ईद का चंाद नजर आने के बाद ही रोजेदार मस्जिद से बाहर आते हैं। रमजान माह में नबी-ए-करीम ने पाबंदी के साथ एतकाफ किया। इसी वजह से इस अमल का बहुत ऊंचा दर्जा है।
अल्लाह मोमिन के सारे गुनाहों को माफ कर नेकियों में इजाफा करते हैं। एक आदमी एतकाफ में बैठ जाए तो उसका हक पूरे मोहल्ले को अदा हो जाता है। एतकाफ में बैठने पर दो हज और एक उमरे का सवाब मिलता है।
पुलिस निरीक्षक अनीस की पत्नी शबाना भाटी मानती हैं कि एतकाफ करने वालों को शब-ए-कद्र की बरकतें मिलती है। जो एतकाफ में शामिल न हो वह इस आखिरी अशरे में इबादत-ए-इलाही में व्यस्त रहें और अल्लाह की इबादत में लीन रहे।
जश्ने शब ए कद्र कल
ऑल इण्डिया तहरीके अहले सुन्नत समिति की ओर से मंगलवार रात जंगली शाह बाबा दरगाह परिसर में जश्ने शबे कद्र जलसे का आयोजन किया जाएगा। जलसे में मौलाना फज्लेहक, सईद मुख्तार रज्वी, मौलाना अलालुद्दीन अंसारी समेत अन्य उलेमाकिराम शिरकत करेंगे। यह जानकारी समिति के महासचिव इदरीस बरकाती ने दी।
Published on:
11 Jun 2018 02:13 pm
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