वर्ष 2012 में एसीबी को शिकायत मिली कि यूआइटी के वरिष्ठ लिपिक ताराचंद सिंघल ने यूआइटी की कई योजनाओं की रिकॉर्ड फाइलें अपने घर पर रख रखी है। वह योजनाओं में लाखों रुपए कमा चुका है, जबकि उसके पास वेतन के अलावा अन्य कोई आय का जरिया नहीं है। उसने आय से अधिक सम्पत्तियां अर्जित कर रखी है। जांच में उसके पास आय से कई गुना अधिक परिसम्पत्तियां पाई गई।