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हाड़ौती की मंडियों ने भरा सरकारी खजाना, इस साल जमा कराए 163 करोड़

वर्ष 2016-17 की अपेक्षा 2017-18 में 1734.58 लाख का अधिक राजस्व जमा हुआ।

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कोटा

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Deepak Sharma

May 28, 2018

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हाड़ौती की मंडियों ने भरा सरकारी खजाना, इस साल जमा कराए 163 करोड़

कोटा . कोटा संभाग की 20 मंडियों से वर्ष 2017-18 में कुल 16358.57 लाख का राजस्व अर्जित हुआ है। वर्ष 2016-17 में इन्हीं 20 मंडियों से 14623.99 लाख का राजस्व सरकारी खजाने में जमा हुआ था। वर्ष 2016-17 की अपेक्षा 2017-18 में 1734.58 लाख का अधिक राजस्व जमा हुआ।

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राजस्व वसूली में भामाशाह मंडी अव्वल, 5 मंडियां फिसड्डी
कृषि विपणन विभाग के आंकड़ों के अनुसार राजस्व वसूली में 2017-18 में भामाशाह मंडी अव्वल रही है। यहां के व्यापारियों ने 2016-17 की अपेक्षा 927.40 लाख का अधिक राजस्व सरकारी खजाने में जमा कराया। यह 23.99 फीसदी अधिक है। वहीं भवानीमंडी, छबड़ा, कोटा थोक फल सब्जीमंडी, रामगंजमंडी तथा सुमेरगंजमंडी की कृषि उपज मंडियां राजस्व वसूली में वर्ष 2016-17 की अपेक्षा पिछड़ी।

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भामाशाह मंडी: सालाना 5000 करोड़ का कारोबार
कोटा ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अविनाश राठी ने बताया कि कोटा की भामाशाह मंडी के व्यापारियों की साख 400-500 किमी दूर मध्यप्रदेश की मंडियों तक फैली हुई है। चाहे किसान हो या बाहर का व्यापारी, सभी को उपज बेचने के तत्काल बाद भुगतान किया जाता है।

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इसी साख के बूते पर श्योपुर, गुना, बीना, अशोकनगर, विदिशा, भवानीमंडी, सोयत, राजगढ़, ब्यावरा, शाजापुर, नीमच, पीपल्या आदि मंडियों से भी कोटा मंडी में माल बिकने आता है। भामाशाह मंडी में सालाना 5 हजार करोड़़ का कारोबार होता है। इसमें से 2 हजार करोड़ का माल एमपी से बिकने आता है।

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हाड़ौती के किसान, व्यापारियों की मेहनत का ही नतीजा है कि प्रदेश में राजस्व वसूली में कोटा संभाग हर साल अव्वल रहा है। गत वित्तीय वर्ष में भी हाड़ौती की 20 मंडियों से 16358.57 लाख का राजस्व अर्जित हुआ है। यह वित्तीय वर्ष 2016-17 की अपेक्षा 1734.58 लाख अधिक हैं।

-हरिशरण मिश्रा, क्षेत्रीय संयुक्त निदेशक,