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राजस्थान के सरकारी और निजी स्कूलों में बनेंगे रोड सेफ्टी क्लब, माध्यमिक शिक्षा निदेशक के निर्देश जारी

राजस्थान के सरकारी और निजी स्कूलों में जल्द ही रोड सेफ्टी क्लबों का गठन किया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने इस संबंध में सभी संयुक्त निदेशकों को निर्देश जारी किए हैं।
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कोटा

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Akshita Deora

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Updated: 29 Jun 2026, 6:48 AM IST

Education Department Sitaram Jat

माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट (फोटो: X डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन राजस्थान)

Road Safety Club In Rajasthan Schools: सड़क सुरक्षा को जनआंदोलन बनाने की दिशा में अब स्कूली बच्चों को भी जोड़ा जाएगा। स्कूलों में रोड सेफ्टी क्लबों का गठन किया जाएगा, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों को ट्रैफिक नियमों की जानकारी दी जाएगी और उन्हें सड़क सुरक्षा का संदेश समाज तक पहुंचाने के लिए तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों को केवल नियमों की जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें व्यावहारिक रूप से जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने सभी संयुक्त निदेशकों को निर्देश जारी किए हैं। ऐसे में राजस्थान के सरकारी और निजी स्कूलों में रोड सेफ्टी क्लब बनाए जाएंगे।

योजना के तहत कोटा जिले के एक हजार से अधिक सरकारी एवं निजी स्कूलों में रोड सेफ्टी क्लब बनाए जाएंगे। प्रत्येक स्कूल में 5 से 10 विद्यार्थियों को रोड सेफ्टी वालंटियर के रूप में चयनित किया जाएगा। ये छात्र अपने स्कूल के साथ-साथ घर और आसपास के क्षेत्रों में भी सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता गतिविधियां संचालित करेंगे।

ट्रैफिक पुलिस भी देगी बच्चों को जानकारी

रोड सेफ्टी क्लबों के माध्यम से विद्यार्थियों को हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने, निर्धारित गति सीमा का पालन करने, मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए वाहन नहीं चलाने तथा यातायात संकेतों को समझने और मानने के बारे में जानकारी दी जाएगी। विशेष बात यह रहेगी कि ट्रैफिक पुलिस भी स्कूलों में पहुंचकर बच्चों से संवाद करेगी और सड़क हादसों के वास्तविक कारणों तथा उनके दुष्परिणामों के बारे में जानकारी देगी।कई बार एक छोटी सी लापरवाही पूरे परिवार की खुशियां छीन लेती है। इसी संदेश को प्रभावी बनाने के लिए ट्रैफिक पुलिस विद्यार्थियों को हेलमेट और सीट बेल्ट के महत्व, ओवर स्पीडिंग के खतरे, सुरक्षित ड्राइविंग के नियमों की जानकारी देगी। विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

क्यों जरूरी है यह पहल

शहर में आज भी दोपहिया वाहन चालक बिना हेलमेट चलते है, कई लोग सीट बेल्ट को औपचारिकता समझते है। युवा वर्ग में ओवर स्पीडिंग और स्टंटबाजी देखते को मिलती है। ऐसे में यदि बच्चों को स्कूल स्तर पर ही सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाए तो आने वाले वर्षाें में दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।

इनका यह कहना

जब विद्यार्थी स्वयं नियमों का पालन करेंगे और अपने परिवार को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे तो सड़क सुरक्षा का संदेश तेजी से घर-घर तक पहुंचेगा। इस पहल के जरिए आने वाली पीढ़ी में ट्रैफिक अनुशासन की भावना विकसित करने और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किया जाएगा। पिछले साल भी हमने स्कूलों में ट्रैफिक पुलिस के माध्यम से बच्चों को नियम की जानकारी उपलब्ध करवाई थी। इस बार भी हम स्कूलों में यह पहल करेंगे।
आशा मंडावत, संयुक्त निदेशक, कोटा संभाग