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बारिश के मौसम ये बीमारियां हो सकती है खतरनाक, ऐसे करें बचाव

मौसम ही नहीं अब बारिश का पानी भी लोगों को बीमार करने पर उतारू है। इसके चलते अस्पतालों में पेटदर्द, हैपेटाइटिस, आंत्रज्वार, डायरिया, मलेरिया और टाइटफाइड के रोगी सामने आ रहे है।

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कोटा

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kamlesh sharma

Sep 04, 2019

seasonal disease

कोटा। मौसम ही नहीं अब बारिश का पानी भी लोगों को बीमार करने पर उतारू है। इसके चलते अस्पतालों में पेटदर्द, हैपेटाइटिस, आंत्रज्वार, डायरिया, मलेरिया और टाइटफाइड के रोगी सामने आ रहे है। पिछले दो माह से हो रही बारिश के कारण खाली पड़े भूखण्डों व अन्य स्थानों पर जमा पानी जमीन में रिसकर नलकूपों के माध्यम से घरों में पहुंच रहा हैं। यही पानी इस्तेमाल के बाद कई तरह की बीमारियों को न्योता दे रहा है। इन दिनों अस्पताल में आने वाले ज्यादातर मरीजों में यहीं बीमारियां प्रमुख है।

डायरिया बच्चों के लिए घातक
डायरिया गंदे पानी से होने वाली सबसे खतरनाक बीमारी है। बच्चे इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते है। बच्चों को अगर दिन में तीन या इससे अधिक बार पतले दस्त आए तो ये डायरिया के ही लक्षण हैं। इससे शरीर से पानी की कमी हो जाती है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज सिंघल ने बताया कि बारिश कि बारिश के बाद पानी में हुए बदलाव से इन्फेक्शन से बच्चे डायरिया के शिकार हो रहे है। अस्पताल में ओपीडी व आईपीडी में बच्चों की संख्या 20 प्रतिशत बढ़ गई है।

मलेरिया भी कर रहा वार
मलेरिया बुखार परजीवी मच्छर मादा एनोफ्लीज द्वारा फैलता है। ये ठहरे हुए और गंदे पानी में ही अपने अंडे देते हैं। इनसे लार्वा निकलते हैं, जो बाद में मच्छर के रूप में मलेरिया के वाहक बनते हैं। इस बीमारी से बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए तो मलेरिया सबसे महिलाओं के लिए तो मलेरिया सबसे घातक बीमारी है। इससे गर्भस्थ शिशु की मृत्यु तक हो सकती है।

लिवर के लिए हैपटाइटिस घातक
हैपटाइटिस का समय रहते पता चल जाए तो यह एंटीबायोटिक्स देने से ठीक हो जाता है, लेकिन टाइफाइड का आमतौर पर समय से पता नहीं चलता। आरंभ में तो यह मामूली बुखार लगता है, जिसे अक्सर अनदेख कर दिया जाता है। कई बार यह अंदर ही अंदर पनप रहा होता है। मेडिकल कॉलेज के सीनियर फिजिशियन डॉ. मनोज सजूला ने बताया कि हैपेटाइटिस जलजनित बीमार है। यह दूषित पानी व खाने से होती है। इसका असर लिवर की कोशिकाओं का भी पड़ता है। अस्पतालों में हैपेटाइटिस ए व ई के मरीजों की संख्या सामने आई हैं।

ऐसे करें बचाव
डायरिया होेने पर बच्चे को एक गिलास पानी में दो चम्मच चीनी और चुटकी भर नमक व नींबू के रस की कुछ बूंदें मिलाकर बार—बार पिलाएं।

नारियल पानी पिलाना भी फायदेमंद होगा।

बच्चे को तरल अधिक मात्रा में दें। ओआरएस व इलेक्ट्रॉल पाउडर का घोल भी कारगर हो सकता है।

हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाएं।
रोजाना 100—250 ग्राम चीनी पानी में घोल कर बच्चे को पिलाएं।

हरी पत्तेदार सब्जियों को सेवन कराएं। पीने के लिए साफ व उबला पानी का इस्तेमाल करें।

पाने का पानी को साफ कपड़े से छान लें। बेहतर होगा कि वाटर प्यूरीफायर का प्रयोग करें।