
फोटो: पत्रिका
Real Life Motivational Story Of Influencers: युवाओं में अब सोशल मीडिया के जरिए अपनी पहचान बनाने और कमाई करने का जुनून तेजी से बढ़ रहा है। पहले इन्फ्लुएंसिंग का चलन केवल बड़े शहरों तक सीमित था, लेकिन अब कोटा, अजमेर, भीलवाड़ा, उदयपुर जैसे शहरों के युवा भी सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म्स पर प्रोफेशनल प्रोफाइल बनाकर सफलता हासिल कर रहे हैं। ये युवा फैशन, फिटनेस, ट्रैवल, एजुकेशन और फूड जैसे क्षेत्रों में अपने-अपने अंदाज में कंटेंट बनाकर दर्शकों से जुड़ रहे हैं। अपनी क्रिएटिविटी दिखाने के साथ कई युवा अब इसे एक स्थायी कॅरियर विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
शिक्षा नगरी कोटा में भी ऐसे कई युवा हैं, जो यहां की कला, संस्कृति, पर्यटन स्थल, लाइफस्टाइल, शिक्षा और खानपान को न केवल प्रोमोट कर रहे हैं, बल्कि लोकप्रियता के साथ अच्छी अर्निंग भी कर रहे हैं। कई स्थानीय इन्फ्लुएंसर्स को अब विभिन्न कंपनियों और संस्थाओं से सहयोग के ऑफर भी मिल रहे हैं। जिससे वह घर बैठें ही लाखों में कमाई कर रहे हैं।
राजीव गांधी नगर निवासी डॉ. सुषमा सिंह ने घर की रसोई में मां, बहन और सास से जो कुछ सीखा, उसे अब कॅरियर का रूप दे दिया है। पीएचडी धारक सुषमा पहले एक इंस्टीट्यूट में नौकरी करती थीं लेकिन नौकरी छोड़नी पड़ी। कुछ समय निराशा के बाद बच्चों ने उनका हौसला बढ़ाया और उन्होंने भारतीय व्यंजनों के स्वाद को लोगों तक पहुंचाने की ठानी।
सुषमा ने खीर, मलाई कोफ्ता, चंगेजी पनीर, सोया कबाब, ब्रेड रसमलाई जैसी कई डिशेज के वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्स पर अपलोड किए। उन्होंने इसी वर्ष मई में शुरुआत की थी लेकिन अब उनके हजारों फॉलोअर्स हैं। सुषमा का मानना है कि अच्छा खाना बनाना हर महिला की एक महत्वपूर्ण स्किल है यह कला गृहिणी को आत्मनिर्भर और परफेक्ट बनाती है। वे यह भी मानती हैं कि महिलाओं को सोशल वर्क से भी जुड़े रहना चाहिए।
स्टेशन क्षेत्र, गांधी कॉलोनी निवासी पवन मीणा ने अच्छी खासी जॉब को दरकिनार कर इन्फ्लुएंसिंग को चुन लिया। दरअसल उन्हें स्मार्ट सिटी की खूबसूरती भी आकर्षित करती है तो कमियां भी झकझौरती हैं। क्षेत्र के इतिहास, मेले, तीज-त्योहार व परपराएं आकर्षित करती हैं। इसी आकर्षण वह इन्हें प्रोमोट करने में जुट गए। जो अच्छा लगता है उसका वीडियो, संवाद सोशल मीडिया पर अपलोड करते हैं।
कोटा दशहरे मेले में रावण पर बनाई गई वीडियो को लाखों लोगों ने देखा और सराहा। कोटा दशहरा मेला ऑनलाइन करीब 150 मिलियन से अधिक लोगों को दिखाया। यह तो सिर्फ उदाहरण हैं। गांव कस्बे के मेले, उत्सव के साथ लाइफ स्टाइल पर आधारित जानकारी देना उन्हें पसंद है। सभी सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म पर उनके 1 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। अब तक 7000 से अधिक वीडियो बना चुके हैं।
केशवपुरा टीचर्स कॉलोनी निवासी जितेंद्र सिंह राजावत, जो सोशल मीडिया पर ‘जीतू भैया मुसाफिर’ के नाम से लोकप्रिय हैं, धार्मिक पर्यटन और कला-संस्कृति को बढ़ावा देने का कार्य कर रहे हैं। वे धार्मिक स्थलों, मंदिरों और मेलों की जानकारी व उनके दर्शन करवाने वाले वीडियो बनाकर लोगों तक पहुंचा रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनके हजारों फॉलोअर्स उनकी लोकप्रियता का प्रमाण हैं।
राजावत बताते हैं कि उन्होंने हाड़ौती क्षेत्र के अधिकांश मंदिरों का भ्रमण किया। प्रदेश सहित अन्य राज्यों में यात्रा के दौरान जब भी कोई अनूठा मंदिर या परंपरा दिखती है, वे वीडियो बनाकर साझा करते हैं। उनका मानना है कि ‘देश में कई ऐसे धार्मिक स्थल और परंपराएं हैं, जिनके बारे में लोगों को जानकारी नहीं है। इन्हें प्रदर्शित कर लोगों को हमारी कला और संस्कृति से जोड़ना ही मेरा उद्देश्य है।’
इंद्रविहार क्षेत्र की भाविका प्रीत रामानी ने अनूठे अंदाज में लाइफस्टाइल को लोगों के सामने पेश किया। कोविड काल के दौरान जब अधिकतर लोग घरों में सीमित थे, तब उन्होंने अपनी क्रिएटिव सोच के साथ बच्चों और घर में उपयोग होने वाली वस्तुओं पर वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा करना शुरू किया। उनके वीडियो लोगों को इतने पसंद आए कि कई कंपनियों ने उनसे सहयोग के लिए संपर्क किया।
धीरे-धीरे भाविका ने करीब 150 से अधिक छोटी-बड़ी कंपनियों की ब्रांडिंग की और एक सफल लाइफस्टाइल इन्लुएंसर के रूप में अपनी पहचान बनाई। उन्हें श्रेष्ठ इन्लुएंसर पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है। भाविका वर्तमान में एक राजनीतिक संगठन के आईटी सेल में संयोजक और सीएआइटी वुमन विंग कोटा की सचिव हैं। उनका कहना है कि ‘अगर आप अपनी रुचि को सही दिशा दें तो हर चुनौती एक नए अवसर में बदल सकती है।’
Published on:
10 Nov 2025 03:17 pm
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