
Stuck tender of cleaning in Kota Municipal Corporation
शहर को स्मार्ट सिटी बनाने का जिम्मा नगर निगम पर है, लेकिन निगम अपने कामकाज के सिस्टम को ही स्मार्ट नहीं बना पा रहा। निगम में फाइलों पर धूल छा रही है। हैरानी की बात यह कि शहर की सफाई-व्यवस्था के नए टेण्डर की पत्रावली ही चार माह से निगम के गलियारे में फुटबाल बनी हुई है। खामियाजा शहर की जनता को भुगतना पड़ रहा। एेसे में सवाल उठ रहा है कि केवल बातों से ही शहर स्मार्ट नहीं बनेगा। निगम के कामकाज को भी स्मार्ट बनाना होगा।
शहर में सफाई-व्यवस्था के नए टेण्डर करवाने तथा सफाई कर्मचारियों को चेक से भुगतान करने सहित अन्य मांगों को लेकर निर्दलीय पार्षद मोहम्मद हुसैन ने जनवरी में भूख हड़ताल की थी। इसके बाद महापौर व तत्कालीन आयुक्त ने लिखित समझौते के तहत एक माह में सफाई के नए टेण्डर करवाने की बात कही थी, लेकिन चार माह बाद भी स्थिति जस की तस है। चार माह से सफाई की पत्रावली आयुक्त और उपायुक्त व लेखा शाखा के बीच ही घूम रही है। एक सप्ताह से पत्रावली आयुक्त कार्यालय में पड़ी है। इधर, नए टेण्डर नहीं होने से शहर की सफाई-व्यवस्था में घालमेल चल रहा। ठेकेदार पूरे कर्मचारी नहीं लगा रहे। निगम की निगरानी व्यवस्था चौपट है।
18.65 करोड़ में होनी है सफाई
शहर के सभी 15 सेक्टरों व मुख्य रोड की सफाई के लिए 18.65 करोड़ के टेण्डर होने हैं। सफाई के टेण्डर खोल भी दिए हैं, लेकिन टेण्डर की दर 40 प्रतिशत से अधिक आ गई है। इस कारण अभी कार्यादेश देने का फैसला नहीं हुआ। टेण्डर की दर अधिक आने के कारण पत्रावली का फैसला आयुक्त या मेयर के स्तर पर होगा।
छिन जाएगी पार्षदों की मलाई
सफाई के नए टेण्डरों में एेसी शर्ते तय की गई, जिससे पार्षदों की मलाई छिन जाएगी। नए टेण्डर में ठेका सफाई कर्मचारियों का भुगतान सीधे बैंक खातों में होगा। उपस्थिति बायोमैट्रिक मशीनों से होगी। इससे पार्षदों का दखल खत्म हो जाएगा। तत्कालीन आयुक्त शिव प्रसाद एम. नकाते के वक्त पार्षदों ने जॉबवर्क के आधार पर टेण्डर करवाने के लिए दबाव बनाया था, लेकिन आयुक्त ने पार्षदों की मांग खारिज करते हुए बीट के आधार पर ही टेण्डर जारी किए थे। नकाते का तबादला होने के बाद नए आयुक्त पर पार्षद दबाव बना रहे हैं। इस कारण भी लेटलतीफी हो रही है।
आरोप-प्रत्यारोप
पार्षद मोहम्मद हुसैन ने आरोप लगाते हुए कहा कि नगर निगम में सफाई में ही घालमेल होता है। ज्यादातर पार्षद ठेकेदारों से मिलीभगत कर कागजों में ही ठेका कर्मी दिखाकर बिल के भुगतान की अनुशंसा कर देते हैं। नए टेण्डर में यह खत्म हो जाएगा। इस कारण जानबूझकर देरी की जा रही है। सात दिन में कार्यादेश नहीं दिया गया तो फिर आंदोलन करेंगे। वहीं महापौर महेश विजय ने कहा कि सफाई टेण्डर प्रक्रिया अंतिम चरण में है। कुछ जगहों के लिए टेण्डर की दर अधिक आने के कारण कार्यादेश देने पर परेशानी आ रही। अधिकारियों को जल्द प्रक्रिया पूरी करने को कहा है।
