
गोवा के मंत्री अतानासियो मोनसेरेट
गोवा के राजस्व मंत्री और बीजेपी विधायक अटानासियो 'बाबुश' मोंसेरेटे को एक विशेष अदालत ने 2016 के एक रेप मामले में सभी आरोपों से बरी कर दिया है। यह मामला करीब 10 साल पुराना है, जिसमें एक महिला ने आरोप लगाया था कि उसकी मां ने उसे 50 लाख रुपये में मोंसेरेटे को 'बेच' दिया था। अदालत ने मोंसेरेटे के साथ ही सह-आरोपी रोसारियो उर्फ रोसी फेरोस को भी क्लीन चिट दे दी। फैसला बुधवार को मर्केस की विशेष अदालत के जज इरशाद अघा ने सुनाया।
मामला 2016 का है, जब मोंसेरेटे उस समय कांग्रेस के टिकट पर सेंट क्रूज से विधायक थे। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि वह एक नाबालिग थी और मोंसेरेटे की लाइफस्टाइल स्टोर में काम करती थी। उसने आरोप लगाया कि रोसी फेरोस के माध्यम से उसकी मां ने उसे मोंसेरेटे को सौंप दिया, जहां उसे ड्रग्स देकर बेहोश किया गया और यौन शोषण किया गया। शिकायत एक महिला सुरक्षा गृह में काउंसलर को बताई गई, जिसके बाद पुलिस ने आईपीसी की धारा 376 (रेप), 370ए (मानव तस्करी), 328 (जहर देकर बेहोश करना), 324 (गलत तरीके से रोकना) और पोक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया।
ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने 40 गवाहों को पेश किया, लेकिन अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता के बयान में कई विरोधाभास थे। उसने कुल छह अलग-अलग बयान दिए, जिनमें एक-दूसरे से टकराव था। शुरुआत में उसने कहा कि वह मोंसेरेटे के घर में खाना-पीना खाकर बेहोश हो गई और अगले दिन सुबह जागी, लेकिन घटना की तारीख के बारे में 61 दिनों (मार्च-अप्रैल) का अस्पष्ट रेंज दिया। बाद में उसने अपना बयान बदलते हुए कहा कि उसने क्राइम शो 'सावधान इंडिया' देखने के बाद अपनी मां से गुस्से में यह झूठा आरोप लगाया।
अभियोजन के अनुसार, अगर वह बेहोश थी तो फोन रिकॉर्ड्स में उस दौरान कॉल, मैसेज की एक्टिविटी नहीं होनी चाहिए थी, लेकिन मार्च-अप्रैल के फोन रिकॉर्ड्स में निरंतर एक्टिविटी दिखी, जो उसके दावे के खिलाफ थी। उम्र तय करने के लिए ऑसिफिकेशन टेस्ट हुआ, लेकिन नाबालिग साबित नहीं हो सकी, इसलिए गोवा चिल्ड्रेंस एक्ट और पोक्सो के कुछ प्रावधान हटा दिए गए।
फैसले के बाद मोंसेरेटे ने कहा, 'मुझे देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा था। अदालत ने मुझे सभी आरोपों से बरी कर दिया है। यह 10 साल का लंबा इंतजार रहा… मैं हर दिन कितना दुख झेला, यह सिर्फ मैं जानता हूं। मैं अपनी फैमिली, दोस्तों और समर्थकों का शुक्रिया अदा करता हूं, जिन्होंने इस मुश्किल वक्त में मेरा साथ दिया।' उन्होंने इसे राजनीतिक साजिश बताया था।
डिफेंस वकील दामोदर धोंड ने कहा कि शिकायतकर्ता के छह बयानों में विरोधाभास थे और फोन रिकॉर्ड्स ने उसके दावे को झुठला दिया। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन आरोप साबित करने में नाकाम रहा।
Published on:
11 Feb 2026 08:16 pm
