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ब्रांडेड कपड़े और दूध-घी का शौकीन घूसखोर पन्नालाल ढाई दशक में जानिए कैसे बना बन गया अरबपति

1993 में हुई पहली नियुक्ति, शाही ठाठ-बाट

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कोटा

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Suraksha Rajora

Dec 27, 2019

ब्रांडेड कपड़े और दूध-घी का शौकीन घूसखोर पन्नालाल ढाई दशक में जानिए कैसे बना बन गया अरबपति

ब्रांडेड कपड़े और दूध-घी का शौकीन घूसखोर पन्नालाल ढाई दशक में जानिए कैसे बना बन गया अरबपति

कोटा. सरकारी नौकरी में हजारों की तनख्वाह पाने वाला पन्नालाल रिश्वत की वसूली से ढाई दशक में अरबपति बन गया। पन्नालाल शाही ठाठ-बाट से रहने का शौकीन है। वह कार्यालय में भी सज-धजकर आता। कार्यालय में पहुंचने के बाद कर्मचारियों पर रौब जमाना उसकी आदत में शुमार था। ब्रांडेड कपड़ों के साथ वह दूध-घी का शौकीन था।


राजसमन्द के मार्बल से बना मालामाल
झालावाड़ से 14 माह बाद ही 21 जुलाई 2000 को पदोन्नति के बाद राजसंमद खनिज अभियंता कार्यालय प्रथम में बतौर अधीक्षण खनिज अभियंता लगाया, यहां पांच वर्ष तक उसने जमकर रिश्वत खाई। धीरे-धीरे मीणा माइनिंग के बारे में जानकारी जुटाता गया। उसका रिश्वत का लालच और हिम्मत बढ़ती चली गई। जहां अधिक खदानें व फैक्ट्रियां होती। वहां अपनी नियुक्ति करवा लेता। माइनिंग के गढ़ राजसंमद जिले के केलवा, निर्झरना, आरना, सापोल, पोदावली, झांझर व पिपलांत्री के साथ आस-पास के मार्बल माइनिंग क्षेत्र में 1200 से अधिक खदानें है।


कहीं भी रहा पर कोटा से नहीं छूटा मोह
पन्नालाल 15 जुलाई 2005 को मार्बल की खदानों से एक बार फिर सेंड एरिया क्षेत्र बूंदी पहुंचा, जहां वह 1 सितम्बर 2010 तक रहा। 14 सितम्बर 2010 को वह कोटा आ गया, जहां वह 25 अगस्त 2013 तक जमा रहा। इसके बाद व अधीक्षक खनिज अभियंता सतर्कता के पद पर 26 अगस्त 2013 से 19 मई 2016 तक तैनात रहा। इसके बाद 20 मई 2016 से 14 अक्टूबर 2016 तक उदयपुर निदेशालय अतिरिक्त खनिज अभियंता मुख्यालय के पर पर रहा। उसके बाद एक बार फिर उसने अपनी पोस्टिंग कोटा में करवा ली।


ब्रांडेड का शौकीन, महंगी गाय का दूध
रिश्वतखोर पन्नालाल महंगे व ब्रांडेड कपड़े पहनने का शौकीन था। उसे महंगी कंपनियों के सूट व लग्जरी लाइफ पंसद थी। पन्नालाल एलिस्टर नस्ल की गाय का दूध पीता था। जिसे उसने महंगे दामों में खरीदा था। गाय की देखभाल के लिए उसने नौकर भी रखा था।


खानों की संख्या के चलते हाड़ौती पसंद
पन्नालाल निदेशालय उदयपुर में 7 अक्टूबर 1993 को सहायक खान अधिकारी के पद पर नियुक्त हुआ। नौकरी के पहले दिन से उसकी नजर हाड़ौती पर थी। नौकरी लगने के ठीक पांच माह बाद वह 7 मार्च 1994 को उदयपुर निदेशालय से बूंदी जिले में आ गया। यहां लाल पत्थर की सैंकड़ों खदानों से उसकी घूसखोरी का सफर शुरू हो गया।

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शिकायतें इस कदर बढ़ीं कि 9 माह बाद 5 दिसंबर 1994 को उसे स्थानान्तरण का झालावाड़ भेज दिया गया। यहां पन्नालाल ने झालावाड़ में कोटा स्टोन की खदानों व खान मालिकों से जमकर माल कूटा। इसके बाद मीणा अधीक्षण खनिज अभियंता के पद पर ऋषभदेव आ गया। यहां मीणा ने 20 महीने नौकरी की। इस दौरान वह हाड़ौती में आने का लगातार प्रयास करता रहा और आखिरकार 17 मई 1999 में फिर से झालावाड़ आ गया।