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ये कॉलोनी है या समस्याओ का घर , सबके लगा चुके है ढ़ोक.. अब किसके दर पर जाये

कोटा. शहर में कई कॉलोनियां ऐसी भी हैं जो सालों पहले बस तो गईं, लेकिन यहां रहने वाले बाशिन्दों को आज भी मूलभूत सुविधाओं का पूर्ण लाभ नहीं मिल रहा।

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शहर में कई कॉलोनियां ऐसी भी हैं जो सालों पहले बस तो गईं, लेकिन यहां रहने वाले बाशिन्दों को आज भी मूलभूत सुविधाओं का पूर्ण लाभ नहीं मिल रहा। ऐसे ही हालात स्टेशन क्षेत्र स्थित महात्मा गांधी कॉलोनी सहित आसपास के क्षेत्र में बसे लोगों के हैं। यहां समस्याएं लोगों के जीवन पर हावी हैं। चाहे फिर वह पानी की समस्या हो या गन्दगी की। सड़क, रोड लाइट व साधनों का अभाव है तो चिकित्सा व्यवस्था भी चरमराई है। पत्रिका टीम ने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को टॉक शो के माध्यम से जाना। इसमें लोगों ने अपनी पीड़ा को खुलकर बताया।

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25 साल बाद भी नहीं सुधरे हालात
गांधी कॉलोनी के एक निजी गार्डन में शनिवार को आयोजित टॉक शो में समस्याओं का अंबार ही लग गया। लोगों से रूबरू हुए तो क्षेत्र की विकट समस्याएं सामने आईं। नाली पटान नहीं होना तो हर गली-मोहल्ले की समस्या है। इसके अलावा पुलिस प्रशासन, नगर निगम, यूआईटी, रेलवे, पीएचईडी सहित कई विभागों से संबंधित समस्याएं एक साथ मुंह उठाए खड़ी नजर आई। कई समस्याओं का समाधान तो 25 साल बाद भी नहीं हुआ। कॉलोनी बनने के साथ ही जो समस्याएं थी वह आज भी हैं।


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सार्वजनिक शौचालय व नल तक नहीं
50 हजार से अधिक आबादी वाले क्षेत्र में सार्वजनिक शोचालय नहीं है। ना ही सार्वजनिक नल है। यहां का व्यापारी वर्ग का कहना है कि स्वच्छ भारत मिशन की बात हो रही है, यहां आकर देखें कहां है स्वच्छ भारत। एक भी शोचालय नहीं होना इसका प्रमाण है कि लोग कैसे जीवन यापन कर रहे हैं।
पशु चिकित्सालय नहीं
पटरी पार क्षेत्र में हजारों बीघा खेतों में खेती की जा रही है। वहीं बड़ी मात्रा में पशुधन भी है। इन पशुओं के बीमार होने की स्थिति में उन्हें या तो खेड़ली फाटक या मोखापाड़ा जाना पड़ता है। पशु चिकित्साल की जरूरत यहां है, जबकी शहर के बीचों बीच चिकित्सालय खोल रखे हैं।

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जीवन तक सुरक्षित नहीं

लोगों के अनुसार मुख्य मार्ग से भारी वाहनों का निकलना विकट समस्या है। दुर्घटनाएं होती रहती हैं। पूर्व में दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो चुकी, जबकि एक युवक पैर गंवा बैठा। गंदगी की समस्या भी विकट है। इस वजह से डेंगू व स्वाइन फ्लू यहां फैल चुका और कई लोगों की जान जा चुकी। मुख्य नाला खुला पड़ा है, जिसमें गिरने से कुछ दिन पहले एक व्यक्ति की मौत हो चुकी।

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बस आती है पर लोग बे-बस
पटरी पार क्षेत्र में सिटी बस तो आती है, पर कब, कहां रुकती है इसकी जानकारी किसी को नहीं। इन बसों पर किसी का बस नहीं है। लोगों ने मांग उठाई कि यहां एक बस स्टॉप बनाया जाए। पटरी पार क्षेत्र में आवागमन के साधनों के अभाव में जनता बेहद परेशान है। ऑटो से शहर में आने के लिए 100 से 300 रुपए देने पड़ते हैं।

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कॉलोनी से बाहर पुलिया चढ़कर जाना पड़ता है। यहां अंडरपास होना चाहिए। कई बार प्रयास किए, लेकिन सुनवाई नहीं होती।
शकुंतला चौधरी
कहीं भी जाना हो तो ऑटो लेना पड़ता है। मिनीडोर व अन्य साधन शुरू होने चाहिए। चन्द्रेसल तक के मार्ग पर परमिट देना चाहिए।
नूरजहां
क्षेत्र में गंदगी की भरमार है। सफाईकर्मी नजर नहीं आते। आते भी हैं तो दुकानों पर बैठकर थोड़ी सी सफाई कर चले जाते हैं।
बानो
क्षेत्र में एक भी सामुदायिक भवन नहीं है। शादी समारोह के लिए परेशानी होती है। गली नम्बर 9 में कार्य अधूरा पड़ा है।
मीना

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बड़े नाले चोक हैं, उनकी सफाई समय पर नहीं की जाती। दुर्गन्ध के चलते जीना दुश्वार हो रहा है। हर जगह गंदगी रहती है।
शमीम बानो
पीने के पानी के लिए एक भी सार्वजनिक नल या वाटर कूलर नहीं है। इससे दुकानदारों को काफी परेशानी होती।
आसिफ अली मंसूरी
इस्लामपुरा में नाला नहीं है। इस कारण पानी मुख्य मार्ग पर भरा रहता है। इससे बीमारियां फैल रही है। नाला निर्माण बेहद जरूरी है।
मोहम्मद सगीर
यहां 27 साल में भी नाला नहीं बन सका। पहले रेलवे के नाले में पानी जाता था, लेकिन रेलवे ने नाला भरवा दिया।
शमसुद्दीन
नालियों की सफाई समय पर नहीं होती। घर में बैठे होने पर भी दुर्गंध आती है। वार्ड पार्षद शक्ल तक नहीं दिखाता। फोन उठाता नहीं है।
पन्नालाल
मुख्य मार्ग पर शराब के कई ठेके हैं। इनके आसपास समाजकंटकों का जमावड़ा रहता है। इससे महिलाओं को निकलने में परेशानी होती है।
गुड्डी

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मुख्य रोड पर कचरा डाला जाता है। यह कई दिनों तक नहीं उठता। यहां कचरा पाइंट बनाया जाना चाहिए।
राधाकृष्ण
गली नम्बर 1 से 6 तक नाला कच्चा बना है। हैण्डपंप के पानी में बदबु आती है। पानी में फ्लोराइड की अधिक समस्या है।
दीपक शर्मा
मुख्य रोड से हेवी टे्रफिक निकल रहा है, जिस कारण दुर्घटना का अंदेशा रहता है। शिकायत के बाद भी समाधान नहीं हो रहा।
साजिश खान, लाला भाई
घरों का कचरा भी समय पर नहीं उठ रहा। कचरा पात्र नहीं है, जिस वजह से सड़क व गलियों में कचरा रहता है।
हुकमचन्द्र
क्षेत्र में कई ऐतिहासिक स्थल व धरोहर हैं, जिनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। चन्द्रेसल, शिकार माला, बावडियां खंडर होती जा रही है।
उमेश शर्मा
बसों के ठहराव के लिए यहां कोई स्टॉपेज नहीं है। ना ही बसों के आने जाने का कोई समय है। स्टॉपेज बनाया जाना चाहिए।
शरीफ
स्वाइन फ्लू व डेंगू का यहां असर अधिक रहता है, कई लोगों की मौत भी हो चुकी है। प्रशासन उसके बाद भी यहां ध्यान नहीं देता।
मोहम्मद अली
लोगों ने प्लाट खरीद कर डाल दिए, जो अब कचरा पाइंट में तब्दील हो गए हैं। कई प्लाटों में पानी भरा हुआ है, जिससे बीमारियां हो रही है।
निर्मला सिंह
कई कॉलोनिया यूआईटी एप्रूव्ड है, लेकिन उसके बाद भी कोई कार्य नहीं हो रहे हैं। रोड लाइटें नहीं होने से भी समस्या आती है।
जाकिर
दो दर्जन से अधिक कॉलोनियों में एक ही कब्रिस्तान है। जनाजे की नमाज के लिए कोई स्थान नहीं है जिस कारण समस्या आती है।
शरीफ मोहम्मद
10 सालों से नालियां व कॉलोनी के रोड नहीं बने हैं। सड़क पर निकलना मुश्किल हो रहा है। वृद्धों को अधिक समस्या आती है।
मांगीलाल सेन
लोगों को 25 साल से भी अधिक समय हो गया, लेकिन पट्टे नहीं मिल रहे। इस कारण लोन व अन्य कार्य में भी परेशानी उठा रहे हैं।
मोसिन खान

काला तालाब पर्यटक स्थल के रूप में विकास होना चाहिए। ये क्षेत्र काफी पिछड़ा है। इसके विकास के लिए अलग से प्रावधान हों।
चांद मोहम्मद
रेलवे व निगम की खींचतान का नतीजा भी लोगों को भुगतना पड़ रहा है। रेलवे अपने क्षेत्र में से नाला नहीं बनाने दे रही।
शौकत

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गांधी कॉलोनी में एक भी सरकारी स्कूल नहीं है। इस कारण निर्धन परिवारों के बच्चों काफी दूर पैदल चलकर जाना पड़ता है।
राजकुमार
स्टेशन क्षेत्र में पत्रिका की ओर समस्याओं को उजागर करने के लिए जनता के बीच जाकर संवाद करना अच्छी पहल है।
गंगाविशन बंसल
पटरी पार क्षेत्र के लोग गंदगी, सड़क और पानी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। प्रशासन को इस क्षेत्र की जल्द सुध लेनी चाहिए।
दिनेश रावत
समाज कंटकों का चौराहे पर जमावड़ा लगा रहता है। रात को गश्त भी नहीं होती। थाने में सुनवाई नहीं नहींं होती।
साहिल गौरी
बच्चों के खेलने के लिए एक भी पार्क नहीं है। नई कॉलोनिया कट रही है, लेकिन उनमें भी पार्क की सुविधा नहीं दी जा रही है।
छीतर लाल
एससी एसटी व अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति नहीं मिल रही। इस कारण परेशानी है। वृद्धावस्था पेंशन भी कई लोगों को नहीं मिल रही।
नासिर खान