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कोटा में हैं ऐसे भी पक्षी कि देखकर यकीन नहीं करेंगे…

चम्बल बायोडायवर्सिटी फेस्टिवल के तहत युवाओं एवं पक्षी विशेषज्ञों के दल ने प्रवासी पक्षियों के कलरव से गुजांयमान जलस्रोतों को निहारा

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Chambal Biodiversity Festival kota

कोटा . चम्बल बायोडायवर्सिटी फेस्टिवल के तहत शनिवार को युवाओं एवं विभिन्न जिलों से आए पक्षी विशेषज्ञों के दल ने प्रवासी पक्षियों के कलरव से गुजांयमान जलस्रोतों को निहारा। चम्बल सहित चार स्थानों पर बर्ड वाचिंग के लिए गए दलों ने जैव विविधताओं से समृद्ध क्षेत्र में भविष्य में पर्यटन की संभावनाओं की भी तलाश की।

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अलग-अलग स्थानों के लिए डॉ. कृष्णेन्द्र नामा, एएच जैदी, अबरार खान भोलू व हाड़ौती नेचुरलिस्ट सोसायटी के आरएस तौमर की लीडरशिप में टोलियां बनाई गईं। उम्मेदगंज गए दल में जयपुर से आए पक्षी विशेषज्ञ मनोज कुलश्रेष्ठ, मध्यप्रदेश से आए डॉ. राकेश व्यास, भरतपुर के पक्षी विशेषज्ञ भोलू, हाड़ौती नेचुरल सोसायटी के आरएस तौमर, मनीष आर्य, दिल्ली की पुष्पा ने उम्मेदगंज को प्रवासी पक्षियों के लिए स्वर्ग बताया। कई दुर्लभ पक्षी भी यहां नजर आए। भरतपुर से आए भोलू खॉन ने बताया कि घना पक्षी विहार की भांति नहर के सीपेज से निकलने वाले पानी में गहराई कम होने के कारण शैवाल एवं जलीय जीवों की उपलब्धता प्रचुर मात्रा में है। इससे यह क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए अनुकूल है। जलस्रोतों के आसपास मानवजनित गतिविधियों को प्रतिकूल बताया।

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ये पक्षी आए नजर

वाचिंग के दौरान स्मॉल पेटकॉन, डक प्रजाति में गेडवॉल, विजन, कॉमन पोचाड, टफटेड पोचाड, गारगनी लसर, विशनिग टिल, स्पालविल डक, सबलेर, कॉमन कूट, पालस, ब्राउन हैडेड गल्ब, वाटर आइड पोचार्ड, स्विंट टर्न, लिटिल टर्न, सैन्ड वाइपर, हूड पाइपर, रैड सैन्क, कॉमन स्नाइप, राइटेल्ड लैपिंग, ब्रोंजविंड जसाना, फ्रजेन्टल जसाना, यलो सीटिन, मारसियल एवं बूटेड ईगल जैसे देशी एवं प्रवासी पक्षी देखने को मिले। उदयपुर से आयीं पक्षी विशेषज्ञ पुष्पा खमेशरा,अनिल रोजर, सर्प विशेषज्ञ चमनसिंह, शेर सोसायटी के डॉ. किरण नामा व अन्य शामिल रहे।

पक्षी प्रेमियों ने साझा किए सुझाव
बर्ड वाचिंग के बाद शाम को उम्मेद क्लब भवन में बैठक हुई। इसमें सभी दलों के सदस्य सहित पक्षी प्रेमियों ने अपने सुझाव साझा किए। डॉ. राकेश व्यास ने कहा कि कोटा में पानी की प्रचुरता है। एक-एक जलस्रोत पर हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षियों की उपस्थिति आने वाले सुनहरे पल की ओर इंगित करती है। अनिल रोजर ने जवाहर सागर में पाए गए जलीय जीवों का प्रजेन्टेशन दिया। परिदों का सफर के प्रशांत रामावत, हाड़ौती नेचुरलिस्ट सोसायटी के आरएस तौमर, मनीष आर्य ने भी अनुभव साझा किए। संचालन रेणु श्रीवास्तव ने किया। एसीएफ शैलेन्द यादव एवं तरूमीतसिंह बेदी ने संभागीय एवं विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेताओं को पुरस्कृत किया।