
शहर को सता रहीं तीन तरह की मादा मच्छर
कोटा. आप जानकार चौंक जाएंगे कि शहर में तीन तरह के मच्छर लोगों को तकलीफ दे रहे हैं। खास बात यह है कि तीनों मच्छर मादा हैं। शहर में मादा एनॉफ्लीज, मादा एडीज व क्यूलेक्स नामक मच्छर से बीमारियां फैल रही हैं। इसके चलते बड़ी तादाद में लोग बीमार होकर अस्पतालों में पहुंच रहे हैं।
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युवाओं में ज्यादा रुचि!
ये मनुष्य का खून इसलिए चूसती हैं, क्योंकि इन्हें अंडे देने के लिए बहुत एनर्जी की जरूरत होती है। ये इंसानों ही नहीं, जानवरों का भी खून चूसते हैं। इसके मुकाबले नर मच्छर को रक्त की ज्यादा जरूरत नहीं होती। ये मच्छर ज्यादातर युवा वर्ग का खून चूस रहे हैं। इससे इन मरीजों की तादाद अधिक पाई जा रही है।
ऐसे फैलाते हैं बीमारी
मच्छर खून पीने के दौरान हमारे अन्दर कुछ ऐसे परजीवी डाल देते हैं, जो बीमारियों के वाहक होते हैं। ये मलेरिया का कीटाणु मनुष्य में फैलाते हैं। इसके बाद मलेरिया पीडि़त को काट कर दूसरे व्यक्ति तक फैला देते हैं। एडीज भी इसी तरह संक्रमण फैलाता है। डेंगू वायरस से संक्रमित मच्छर के काटे जाने के 3-5 दिनों में डेंगू के लक्षण दिखने लगते हैं। यह अवधि 3 से 10 दिन तक की भी हो सकती है।
एक्सपर्ट व्यू
एनॉफ्लीज, एडीज व क्यूलेक्स तीनों ही मादा मच्छर हैं जो बीमारियां फैलाते हंै। मादा एडीज साफ पानी में पनपता है। यह दिन में काटता है। इनके शरीर में चीते जैसी धारियां होती है। मच्छर के लिए अनुकूल तापमान 18 से 32 डिग्री व आद्र्रता 60-80 प्रतिशत होना चाहिए। एक व्यस्क मच्छर 2-3 सप्ताह तक जीवित रहता है। एडीज मच्छर घरों में अंधेरे कोनों, परदे के पीछे, कपड़ों पर टेबल के नीचे छुपा रहता है।
डीपी चौधरी, कीट विशेषज्ञ
Published on:
24 Nov 2019 06:23 pm
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