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दिल्ली तक मचा हड़कंप, SIR में वोटर लिस्ट से कट गए कोटा से 1.59 नाम, BJP ने दिग्गज नेताओं को सौंपा ये काम

Kota News: कोटा जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम (एसआईआर) के तहत लाखों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से कटने से हड़कंप मच गया है।

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कोटा

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Akshita Deora

Jan 08, 2026

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एक घर मे गणना प्रपत्र भरवाते BLO (फोटो: पत्रिका)

1.59 Million Voter Names Deleted In Kota: विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम (SIR) में कोटा जिले में 1.59 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से कट गए हैं। प्रदेश में भी लाखों मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हट गए हैं। इसकी रिपोर्ट भाजपा के दिल्ली शीर्ष नेतृत्व तक पहुंची तो हड़कंप मच गया।

शीर्ष नेतृत्व ने इसे अत्यंत गंभीर माना है। अब जिला स्तर पर भी एसआइआर की मॉनिटरिंग का जिम्मा प्रदेश नेतृत्व ने अपने हाथ में ले लिया है। प्रदेश स्तर के वरिष्ठ नेता एसआइआर की डे-टुडे की प्रगति रिपोर्ट जिले से लेंगे और प्रदेश नेतृत्व को भेजेंगे।

इधर कांग्रेस का आरोप है कि बीएलओ ने दबाव में कई जगह जो डबल नाम थे, उनको नहीं हटाया है। कांग्रेस ऐसे मामलों की सूची तैयार करवा रही है। वहीं बूथवार मतदाता सूचियों के बारे में सर्वे करवा रही है।

ऐसे कटे मतदाताओं के नाम

केन्द्रीय निर्वाचन आयोग ने प्रदेश में 27 अक्टूबर को मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम घोषित किया था। जिसके तहत 4 नवंबर से 11 दिसंबर तक गणना के चरण के दौरान सभी मतदाताओं को गणना प्रपत्र वितरण एवं संग्रहण का कार्य संपन्न किया गया।

गहन पुनरीक्षण कार्य प्रारंभ होने से पहले कोटा जिले में कुल मतदाताओं की संख्या 15,32,500 थी जिनको गणना प्रपत्र वितरित किए गए थे। इसके बाद कोटा जिले के 13,72,762 मतदाताओं ने गणना प्रपत्र भरकर 16 दिसंबर तक जमा रकवा दिए। इस आंकड़े के अनुसार जिले में 1 लाख 59 हजार 788 मतदाताओं के नाम कट गए।

शीर्ष नेतृत्व की तल्खी

सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने राजस्थान से लेकर जिला स्तर के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों और मंत्रियों की क्लास ली। कोटा जिले में डेढ़ लाख से अधिक मतदाताओं के नाम कटने के बारे में हर विधानसभा क्षेत्रवार, बूथवार जानकारी ली।

शीर्ष नेतृत्व ने हर बूथवार विस्तृत डाटा स्टडी की। इसमें पाया गया कि जिन बूथों में हमेशा भाजपा अच्छे-खासे अंतर से चुनाव जीतती रही, वहीं ज्यादा नाम कट गए हैं।

पार्टी के दिल्ली के शीर्ष नेतृत्व ने पिछले दिनों वीसी लेकर कई बूथों का उदाहरण देते हुए प्रदेश और जिले के नेताओं की खिंचाई की थी। शीर्ष नेतृत्व ने सख्त चेताया कि यदि पात्र मतदाताओं के नाम नहीं जुड़वा पाए तो नुकसान होगा। क्योंकि आने वाले चुनाव में यह पार्टी के लिए अच्छा नहीं होगा। इसके बाद मुख्यमंत्री ने जिलेवार विधायकों और मंत्रियों की बजट सुझावों के नाम पर बैठकें लेकर एसआइआर पर बात की।

कोटा में इन नेताओं को सौंपा जिम्मा

भाजपा के प्रदेश महामंत्री मिलेश गौतम कोटा जिला, श्रणव सिंह को कोटा शहर तथा पूर्व जिलाध्यक्ष मानसिंह को कोटा देहात में एसआइआर की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी है।

अब ऐसे जुड़वा सकेंगे नाम

चुनाव आयोग के अनुसार, मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए अब भी संबंधित मतदाता बीएलओ को संबंधित दस्तावेज देकर अपना नाम जुड़वा सकेंगे। मतदाता सूची के संबंध में 15 जनवरी तक दावे और आपत्तियां प्राप्ति की जाएंगी।

इस अवधि में प्रारूप मतदाता सूची में सम्मिलित मतदाताओं के संबंध में दावे एवं आपत्तियां प्रस्तुत कर सकते हैं। चुनाव आयोग की ओर से 14 फरवरी को मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा।

एसआइआर कार्यक्रम के तहत जिन मतदाताओं के नाम रह गए हैं, उनके नाम जुड़वाने के लिए पार्टी ने टास्क दिया है। इसके लिए प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है।

  • राकेश जैन, जिलाध्यक्ष, भाजपा कोटा

राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर मतदाता सूचियों में नाम जुड़वाने के कार्य पर निगरानी के लिए राज्यभर में प्रदेश पदाधिकारियों को लगाया गया है। ताकि एसआइआर का कार्य बेहतर हो सके।

  • छगन माहुर, प्रदेश उपाध्यक्ष, भाजपा

कांग्रेस पार्टी बूथवार मतदाता सूचियों के बारे में सर्वे करवा रही है। हमारी जानकारी में आया है कि बीएलओ ने दबाव में कई जगह डबल नाम थे, उनको नहीं हटाया है। उनकी सूची भी तैयार करवा रहे हैं। पात्र मतदाताओं के नाम जुड़वाने का काम चल रहा है।

  • राखी गौतम, शहर जिलाध्यक्ष, कांग्रेस कोटा

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