2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बनना था सामुदायिक भवन, बन गया कूड़ाघर

कंसुआ अफोर्डेबल हाउसिंग - यूआईटी ने दो बिल्डरों के साथ डवलप की थी स्कीम- काम बीच में छोड़कर भागे बिल्डर, यूआईटी ने दिया नोटिस

2 min read
Google source verification

कोटा

image

Deepak Sharma

Aug 27, 2018

kota

kota news

कोटा. यूआईटी ५ साल बाद भी कंसुआ अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के सामुदायिक भवन का निर्माण कार्य पूरा नहीं करा सकी। दीवारें खड़ी होने के बाद काम बीच में ही बंद होने से अब यह जगह कचरा पाइंट में तब्दील हो गई है। पूरी योजना का कूड़ा यहीं फेंका जा रहा है।

यूआईटी ने पीपीपी मोड पर कंसुआ अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम डवलप की थी। योजना विकसित करने में जुटी निजी कंपनियां नवभारत इंटरप्राइजेज और विनम्र निर्माण कंपनी फ्लेट बनाने के बाद जो काम बचा उसे बीच में ही छोड़कर चली गईं। यूआईटी ने वर्ष २०१३ में आवंटियों को कब्जा भी दे दिया, लेकिन पांच साल बाद भी यहां सामुदायिक भवन का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका।

फेंका जाने लगा कूड़ा

दोनों कंपनियां सामुदायिक भवन की दीवारें खड़ी होने के बाद लेंटर डालने की बजाय काम बीच में ही छोड़कर चली गईं। इसके बाद यूआईटी ने कई बार अधूरे काम को पूरा करने के लिए दोनों डवलपर को चि_ियां लिखीं, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। इस दौरान कॉलोनी के लोगों ने यहां कचरा डालना शुरू कर दिया। देखते ही देखते निर्माणाधीन सामुदायिक भवन कूड़ेघर में तब्दील हो गया।

जारी किया नोटिस

दोनों डवलपर्स को सामुदायिक भवन का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए नोटिस जारी कर दिया गया है। यदि १० दिन में कोई जवाब नहीं आता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

- आरके राठौर, यूआईटी एक्सईएन

....

यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा

बीनबाजा, लाडपुरा क्षेत्र स्थित सामुदायिक भवन समाजों के काम नहीं आ रहे। समाजकंटकों का यहां जमावड़ा रहता है। राष्ट्रीय कच्ची बस्ती विकास कार्यक्रम के तहत करीब २० वर्ष पहले १९९८ में सामुदायिक भवन बनवाया गया था, लेकिन यह अनदेखी का शिकार हो गया। इसमें न दरवाजे हैं न खिड़कियां। लोगों के अनुसार अंधेरा होते ही यहां समाजकंटक आ जाते हैं। भवन में कबाड़ा जमा तो कक्षों में गंदगी फैली है। कई बार श्वान भी प्रवेश कर जाते हैं। बिजली के तार झूल रहे हैं। इस भवन की हालत सुधर जाए तो यह लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।