
अकेलगढ़ हैडवक्र्स में पानी की बर्बादी को देख जलदाय मंत्री किरण माहेश्वरी की फटकार और कार्रवाई की तलवार अपने ऊ पर लटकी देख जलदाय अभियंताओं ने शहर में जलापूर्ति व्यवस्था को सुचारू रखने की अपनी जिम्मेदारी से ही मुंह मोड़ लिया है। पूरा ध्यान अब मंत्री की नाराजगी दूर करने में है।
अकेलगढ़ हैडवक्र्स में बहते पानी को रोकने के लिए पिछले कई दिनों से नए-नए प्रयोग व मरम्मत कार्य किए जा रहे हैं, इससे अकेलगढ़ हैडवक्र्स में कभी पाइप लाइन, कभी पम्प हाउस तो कभी फिल्टर बैड बंद रहने से जल उत्पादन घट गया है।
इससे शहर के कई इलाकों में उच्च जलाशय नहीं भर पा रहे। इससे ग्रेविटी सप्लाई के साथ उच्च जलाशयों का पानी नहीं मिल पा रहा। वितरण लाइनों में पानी का दबाव कम होने से कई इलाकों में जलसंकट पैदा हो गया है।
जरूरत बढ़ी, जलापूर्ति घटी
शहर में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। एेसे में लोगों की पानी की जरूरत भी बढ़ी है। वहीं अकेलगढ़ से पहले प्रतिदिन 25 करोड़ लीटर पानी का उत्पादन हो रहा था, जो पिछले कुछ दिनों से करीब 20 करोड़ लीटर पर पहुंच गया है। कई बार ट्रिपिंग के चलते पम्प बंद होने के बाद तो समस्या और गहरा रही है। पानी का दबाव कम होने से कई जगह तो पानी मकानों की दहलीज भी पार नहीं कर रहा।
इन इलाकों में नहीं भर पा रहे उच्च जलाशय
जल उत्पादन में आई कमी का अधिक असर टेल क्षेत्रों की जलापूर्ति पर पड़ा है। डीसीएम क्षेत्र, शॉपिंग सेंटर, विज्ञाननगर, बंगाली कॉलोनी में स्थित उच्च जलाशय आधे से भी कम भर पा रहे हैं। डीसीएम क्षेत्र में समस्या को कम करने के लिए स्थानीय जलदाय अभियंताओं ने अनंतपुरा स्थित उच्च जलाशय तक को भरना बंद किया हुआ है,
ताकि डीसीएम क्षेत्र में गोविन्दनगर व जेके जलदाय चौकी स्थित उच्च जलाशयों में पानी मिल सके। जलाशयों के नहीं भरने से शॉपिंग सेंटर, बल्लभबाड़ी, छावनी, विज्ञाननगर, लघु औद्योगिक क्षेत्र, बंगाली कॉलोनी, गुमानपुरा, सिंधी कॉलोनी, कोटड़ी, कंसुआ, प्रेमनगर, गोविन्दनगर सहित कई क्षेत्रों में लोगों को भारी परेशानी हो रही है।
अकेलगढ़ में वाल्व आदि की मरम्मत का कार्य किया गया है। इसके चलते जल उत्पादन कुछ कम हो गया था, अब फिर से पूरी क्षमता से जल उत्पादन शुरू हो गया है, परेशानी दूर हो जाएगी।
राकेश कुमार, एसई, जलदाय विभाग कोटा वृत्त
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